Tuesday, 18 December 2018

दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय ने 1984 के दंगे मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई

दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय ने कांग्रेस नेता सज्‍जन कुमार को 1984 के दंगा मामलों में हत्‍या की साजिश रचने का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

न्‍यायाधीश एस मुरलीधर और न्‍यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने सज्‍जन कुमार को आपराधिक साजिश रचने और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का दोषी ठहराया है। न्‍यायालय ने कहा कि सज्‍जन कुमार को 31 दिसम्‍बर तक आत्‍मसमर्पण करना होगा। न्‍यायालय ने सज्‍जन कुमार को दिल्‍ली छोड़कर नहीं जाने का भी निर्देश दिया है।

उच्‍च न्‍यायालय, पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर, नौसेना के सेवानिवृत्‍त कैप्‍टन भागमल, गिरधारी लाल, पूर्व विधायक महेन्‍द्र यादव और किशन खोखर को भी इस मामले में दोषी करार दे चुका है।

31 अक्‍तूबर 1984 को तत्‍कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की उनके अंगरक्षकों द्वारा हत्‍या किए जाने के बाद ये दंगे हुए थे।

कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाए जाने का राजनीतिक नेताओं ने स्वागत किया है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि सच्चाई छुपाने की कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं।

दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय का फैसला स्‍वागत योग्‍य है। हममें से अनेक लोगों के सामने 1984 में दिल्‍ली और देशभर के कई हिस्‍सों में जो कुछ हुआ वह शायद अब तक का सबसे भयावह नरसंहार था। ये सुनिश्चित करने की बजाए कि पीडि़तों को न्‍याय और दोषियों को सजा मिले, कांग्रेस सरकारें बार-बार इसे छिपाने के काम में लगी रही।

सूचना और प्रसारण मंत्री राज्‍यवर्द्धन राठौड़ ने कहा कि सज्‍जन कुमार को सजा सुनाये जाने से 1984 के दंगों में उनका शामिल होना सिद्ध होता है।

भारतीय जनता पार्टी के अध्‍यक्ष अमित शाह ने कहा है कि 1984 दंगों के मामलों में सज्‍जन कुमार के बारे में दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय के निर्णय से दंगा पीडि़‍त परिवारों को राहत मिली है।

शिरोमणि अकाली दल के नेता प्रेम सिंह चंदुमाजरा ने मांग की है कि दंगों में शामिल अन्य कांग्रेस नेताओं पर भी मुकदमें चलाए जाएं।

उधर, कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस फैसले का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।

ये पुरानी कार्यवाही है। कम से कम 2 साल से अलग-अलग विभिन्‍न कार्यवाहिया चल रही है। उसमें से एक का निर्णय आज आया है। कानूनी कार्यवाही चलनी चाहिए, चल रही है। इसके बाद अपीलें होती है, तो मैं नहीं समझता कि इसमें राजनीतिक टिप्‍पणी करके राजनीतिक लाभ या राजनीतिक दुरूपयोग किया जाए।

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