Saturday, 12 January 2019

आलोक वर्मा ने तोड़ी चुप्पी; कहा, मेरे ऊपर लगे आरोप झूठ, निराधार और फर्जी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मात्र दो दिन बाद पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली एक हाई पावर सेलेक्शन कमेटी द्वारा हटाए जाने पर आलोक वर्मा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. सीबीआई चीफ पोस्ट से हटाए गये आलोक वर्मा ने कहा कि झूठे, अओरिजिनल और बेहद हल्के आरोपों को आधार बनाकर ट्रांसफर किया गया है. आगे उन्होंने कहा कि ये आरोप उस एक शख्स ने लगाए हैं, जो उनसे द्वेष रखता है. बता दें कि सीबीआई यानी केंद्रीय जांच ब्यूरो निदेशक पोस्ट से हटाए जाने के बाद आलोक वर्मा को अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड का महानिदेशक बनाया गया है. 

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली एक हाई पावर सलेक्शन कमेटी के फैसले पर चुप्पी तोड़ते हुए आलोक वर्मा ने कहा है कि उनको झूठे, तथ्यहीन और मनगढंग आरोपों को आधार बनाकर ट्रांसफर किया गया है और यह सब उस एक व्यक्ति ने लगाए हैं जो उनसे द्वेष रखता है।

आलोक वर्मा ने एक बयान में कहा कि सीबीआई उच्च सार्वजनिक जगहों में भ्रष्टाचार से निपटने वाली एक प्रमुख जांच एजेंसी है जिसकी स्वतंत्रता को संरक्षित और सुरक्षित किया जाना चाहिए। इसे बिना किसी बाहरी दखलअंदाजी के काम करना चाहिए। मैंने संस्था की साख बनाए रखने की कोशिश की है जबकि इसे नष्ट करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यही केंद्र सरकार और सीवीसी के 23 अक्टूबर के आदेशों में देखा जा सकता है जो बिना किसी क्षेत्राधिकार के दिया गया था।

आलोक वर्मा ने कहा कि कमेटी को सीबीआई के निदेशक के रूप में अपने भविष्य के कार्य को तय करने का काम सौंपा गया था। उन्होंने कहा कि मैं संस्था की अखंडता के लिए खड़ा हुआ हूं और अगर पूछा जाए तो कानून के शासन को बनाए रखने के लिए इसे फिर से करना होगा।

खड़गे ने किया था हटाने का विरोध

गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दो दिन बाद प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली हाई पावर सलेक्टन कमेटी ने आलोक वर्मा को भ्रष्टाचार और ड्यूटी में लापरवाही बरतने को लेकर सीबीआई डायरेक्टर पोस्ट से हटा दिया।कमेटी की बैठक में 2:1 से ये फैसला लिया गया। पैनल में मौजूद पीएम मोदी और चीफ जस्टिस के प्रतिनिधि के तौर पर मौजूद जस्टिस एके सीकरी आलोक वर्मा को हटाने के पक्ष में थे। वहीं, तीसरे सदस्य के तौर पर लोकसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे आलोक वर्मा को हटाने के विरोध में थे। इसके विरोध में उन्होंने चिट्ठी भी सौंपी।

पैनल ने संस्था के विपरीत पाया आचरण

पैनल ने पाया कि सीवीसी ने आलोक वर्मा पर गंभीर टिप्पणियां की हैं। आलोक वर्मा जिस तरह के संवेदनशील संस्था के प्रमुख थे, उन्होंने वैसा आचरण नहीं किया। पैनल के मुताबिक सीवीसी को लगा है कि मोइन क़ुरैशी मामले में आलोक वर्मा की भूमिका संदेहास्पोस्ट है। आईआरसीटीसी मामले में सीवीसी को ये लगा है कि जानबूझकर वर्मा ने एक नाम हटाया है। वहीं सीवीसी को कई दूसरे मामलों में भी उनके  खिलाफ सबूत मिले हैं।

सीवीसी जांच को नहीं बनाया जा सकता आधार

इससे पहले बुधवार को हुई सलेक्शन कमेटी की बैठक बेनतीजा रही थी। बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ को पूरे अधिकार दिये जाने चाहिए। इसके साथ ही खड़गे ने आलोक वर्मा के खिलाफ सीवीसी की जांच के सभी दस्तावेज समिति के सामने पेश करने की मांग की। उनका कहना था कि सिर्फ सीवीसी की जांच के आधार पर फैसला नहीं किया जा सकता है। यह देखना जरूरी है कि सीवीसी ने जांच किन जरुरी दस्तावेज़ं के आधार पर की थी।

कुर्सी संभालते ही किए ट्रांसफर

आलोक वर्मा ने बुधवार को 77 दिनों बाद अपना पोस्ट संभालते ही तत्कालीन निदेशक (प्रभारी) एम नागेश्वर राव द्वारा किए गए लगभग सारे तबादले रद्द कर दिए थे। वहीं, गुरुवार को उन्होंने बड़े फैसले लेते हुए पांच अधिकारियों के तबादले कर दिए। वर्मा ने जेडी अजय भटनागर, डीआईजी एमके सिन्हा, डीआईजी तरुण गौबा, जेडी मुरुगसन और एडी एके शर्मा का तबादला किया। साथ ही उन्होंने सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अजगहा के खिलाफ जांच के लिए आईपीएस अधिकारी मोहित गुप्ता की नियुक्ति भी की।

आलोक वर्मा बनाम राकेश अजगहा

सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और जांच एजेंसी के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अजगहा के बीच छिड़ी जंग सार्वजनिक होने के बाद सरकार ने दोनों अधिकारियों को उनके अधिकारों से वंचित कर छुट्टी पर भेजने का निर्णय किया था। दोनों अधिकारियों ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये थे।

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