Thursday, 14 February 2019

Gully Boy के ज़माने में याद आया ‘चमेली की शादी’ वाला प्यार : अमृता सिंह

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हां तो जनाब वेलेनटाइन डे के अवसर पर जब हम सब प्रेम की पींगे मार रहे हैं तो आपको उन दिनों की कहानी सुनाते हैं, जब प्रेम को भूमंडलीकरण के पंख नहीं लगे थे और प्रेम मुहल्ले में फलता फूलता था. मतलब ये कि चमेली का मोहल्ले के लड़के चरनदास से लपड़-झपड़ चलता था तिस पर दोनों की बिरादरी भी अलग थी और प्रेमी युगल को साथ देखे जाने की खबर पूरे मोहल्ले में जंगल की आग की तरह फैल जाती थी. तब प्रेम कुछ यूं परवान चढ़ता था...

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फिल्म है बासु चटर्जी द्वारा निर्देशित ‘चमेली की शादी’ और मामला है, चमेली (अमृता सिंह) और चरनदास (अनिल कपूर) का. 1986 में आई ये फिल्म आज भी रोमांचित करती है, कभी सोंचा है क्यों? क्योंकि ये फिल्म कहीं न कहीं हमें परफेक्शन, आधुनिकता और बाज़ारवाद के बोझ से छुटकारा दिलाती है. यहां चमेली और चरनदास एक दूसरे से परफेक्ट होने की उम्मीद नहीं करते, एक हायर सेकेंड्री थर्ड डिवीज़न से पास होता है तो दूसरी आठवीं में चार बार फेल, फिर भी दोनो को प्रेम हो जाता है. प्यार की पहली सौगात फूल, गुलदस्ता या उपहार की जगह कोयले की बोरी है, जिसे चमेली चरनदास के घर भेजवाती है वो भी कंट्रोल रेट से.

दरअसल अपने प्यार के लिए अपने पिता कल्लूमल के खिलाफ ये चमेली की पहली बगावत है, क्योंकि कल्लूमल कोयले वाला साठ रुपए बोरी कोयला बेचता है, और चरनदास को कोयला कंट्रोल रेट पर चाहिए. तो चमेली ने कर दी बगावत और भेज दी चरनदास को एक बोरी कोयले की अमानत.

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ये प्यार मोबाइल और व्हाट्सएप के जमाने का नहीं है तो हाल-ए-दिल ख़तों के जरिए साझा किए जाते है. लेकिन दोनों ही प्यार में सोफेस्टिकेटेड होने के इल्म से वाकिफ नहीं है, इन्हें अपना इश्क मुकम्मल करने की जल्दबाजी है. एक तरफ चरनदास पहले खत में ही मिलने से लेकर शादी तक सब तय कर लेना चाहता है तो दूसरी तरफ चमेली पहली ही चिट्ठी में निसंकोच मेरे प्यारे चरनदास लिख देना चाहती है. आज के नौजवानों की तरह इन्हें प्यार को ले कर दुविधा या कन्फ्यूजन नहीं हैं, मामला क्लियरकट है कि दोनों को एक दूसरे से प्यार है.

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