Thursday, 7 February 2019

देखें, ऐसे करें शिव चालीसा का पाठ, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं..

देखें, ऐसे करें शिव चालीसा का पाठ, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं..

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

पूजा पाठ में शिव चालीसा का बहुत महत्व है. शिव चालीसा के सरल शब्दों से भगवान शिव को प्रसन्न किया जा सकता है. शिव चालीसा के पाठ से कठिन से कठिन कार्य को बहुत ही आसानी से किया जा सकता है. शिव चालीसा की 4 पंक्तियां सरल शब्दों में विद्यमान हैं, जिनकी महिमा बहुत ही ज्यादा है. भोले स्वभाव के होने के कारण भगवान भोले भंडारी शिव चालीसा के पाठ से आसानी से मान जाते हैं और भक्त को मनचाहा वरदान दे देते है. इसलिए शिव चालीसा के पाठ की बहुत महिमा है.

जानते हैं शिव चालीसा का पाठ कैसे किया जाए-

- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहने.

- अपना मुंह पूर्व दिशा में रखें और साफ आसन पर बैठें.

- पूजा में धूप दीप सफेद चंदन माला और सफेद 5 फूल भी रखें और मिश्री को प्रसाद के लिए रखें.

- पाठ करने से पहले गाय के घी का दिया जलायें और एक लोटे में शुद्ध जल भरकर रखें.

- भगवान शिव की शिव चालिसा का तीन बार पाठ करें.

- शिव चालीसा का पाठ बोल बोलकर करें, जितने लोगों को यह सुनाई देगा उनको भी लाभ होगा.

- शिव चालीसा का पाठ पूर्ण भक्ति भाव से करें और भगवान शिव को प्रसन्न करें.

- पाठ पूरा हो जाने पर लोटे का जल सारे घर मे छिड़क दें और थोड़ा सा जल स्वयं पी लें. मिश्री प्रसाद के रूप में खाएं औऱ बच्चों में भी बांट दें.

शिव चालीसा पढ़कर ऐसे पाएं मनचाहा वरदान-

- ब्रह्म मुहूर्त में एक सफेद आसन पर बैठें.

- उत्तर पूर्व या पूर्व दिशा की तरफ मुंह करें.

- गाय के घी का दिया जला कर शिव चालीसा का 11 बार पाठ करें.

- जल का पात्र रखें और मिश्री का भोग लगाएं.

- एक बेलपत्र भी उल्टा करके शिवलिंग पर अर्पण करें.

- मनचाहे वरदान की इच्छा करें और यह पाठ 4 दिन लगातार करें.

शिव चालीसा से होंगे ढेरों फायदे-



घर बैठे फ्री पैसे कमाने के लिए क्लिक करे यहाँ जाये

1. मन का भय यदि है तो निम्न पंक्ति पढ़ें. इस पंक्ति को 27 बार सुबह भगवान शिव के सामने पड़ने से लोभ होगा.

जय गणेश गिरीजा सुवन’ मंगल मूल सुजान|

कहते अयोध्या दास तुम’ देउ अभय वरदान||

2. दुखों से मुक्ति पाने के लिए ये पंक्ति पढ़ें.

देवन जबहिं जाय पुकारा’ तबहिं दुख प्रभु आप निवारा||

- इस पंक्ति को 11 बार रात्रि में पढ़ कर सोएं और कार्य सिद्ध हो जाने पर निर्धन लोगों को सफेद मिठाई जरूर बाटें.

3. किसी भी कार्य को सिद्ध करने के लिए निम्न पंक्ति पढ़ें.

पूजन रामचंद्र जब कीन्हा’ जीत के लंक विभीषण दीन्हा||

- इस पंक्ति को 13 बार शाम के समय पढ़ें.

- ऐसा लगातार 27 दिन जरूर करें.

4. मनोवांछित वर प्राप्ति के लिए करें इस पंक्ति का पाठ करें.

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर’ भाई प्रसन्न दिए इच्छित वर||

- इस पंक्ति को मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए सुबह के समय 54 बार पाठ करें. ऐसा आपको 21 दिन करना है.

5. धन धान्य की वृद्धि के लिए इस पंक्ति का पाठ करें.

धन निर्धन को देत सदा ही’ जो कोई जांचे सो फल पाही||

- इस पंक्ति को 11 बार सुबह के समय पढे़ं.

निचे कमेंट करके अपने राय जरुर बताये की आपको ये पोस्ट कैसी लगी

इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगो तक शेयर करे, और इस तरह के पोस्ट को पढने के लिए आप हमारी वेबसाइट विजिट करते रहे.

देखें, सीता माता की तरह ही हुआ था लक्ष्मी माँ का भी हरण!..

देखें, सीता माता की तरह ही हुआ था लक्ष्मी माँ का भी हरण!..

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

पुरानी कहानियों और कथाओं के अनुसार कई ऐसी बातें बताई गई है जिन्हे सुनने के बाद हैरानी होती है. ऐसे में आप सभी ने शायद ही सुना होगा कि सीता की तरह माता लक्ष्मी का भी हरण हो गया था. जी हाँ, यह बात कई लोगों ने कहीं ना कहीं पौराणिक कथाओं में सुनी होगी और कई लोगों ने नहीं भी. ऐसे में अब आज हम आपको इसकी पौराणिक कथा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे पढ़ने के बाद आ हैरान रह जाएंगे. आइए जानते हैं.

पौराणिक कथा - देवासुर संग्राम में देवताओं के पराजित होने के बाद सभी देवगुरु बृहस्पति के पास पहुंचे. इंद्र ने देवगुरु से कहा कि असुरों के कारण हम आत्महत्या करने पर मजबूर है.
देवगुरु सभी देवताओं को दत्तात्रेय के पास ले गए. उन्होंने सभी देवताओं को समझाया और फिर से युद्ध करने की तैयारी करने को कहा. सभी ने फिर से युद्ध किया और हार गए. वे फिर से विष्णुरूप भगवान दत्तात्रेय के पास भागते हुए पहुंचे. वहां उनके पास माता लक्ष्मी भी बैठी थी. दत्तात्रेय उस वक्त समाधिस्थ थे. तभी पीछे से असुर भी वहां पहुंच गए. असुर माता लक्ष्मी को देखकर उन पर मोहित हो गए. असुरों ने मौका देखकर लक्ष्मी का हरण कर लिया. दत्तात्रेय ने जब आंख खोली तो देवताओं ने दत्तात्रेय को हरण की बात बताई. तब दत्तात्रेय ने कहा, ‘अब उनके विनाश का काल निश्चत हो गया है.’ तब वे सभी कामी बनकर कमजोर हो गए और फिर देवताओं ने उनसे युद्ध कर उन्हें पराजित कर दिया. जब युद्ध जीतकर देवता भगवान दत्तात्रेय के पास पहुंचे तो वहां पहले से ही लक्ष्मी माता बैठी हुई थी. दत्तात्रेय ने कहा कि लक्ष्मी तो वहीं रहती है जहां शांति और प्रेम का वातारण होता है. वह कभी भी कैसे कामियों और हिंसकों के यहां रह सकती है?

एक अन्य कथा अनुसार - दैत्येगुरु शुक्राचार्य के शिष्य असुर श्रीदामा से सभी देवी और देवता त्रस्त हो चले थे. सभी देवता ब्रह्मदेव के साथ विष्णुजी के पास पहुंचे. विष्णुजी ने श्रीदामा के अंत का आश्वासन दिया. श्रीदामा को जब यह पता चला तो वह श्रीविष्णु से युद्ध की योजना बनाने लगा. दोनों का घोर युद्ध हुआ. लेकिन श्रीदामा पर विष्णुजी के दिव्यास्त्रों का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि शुक्राचार्य ने उसका शरीर वज्र के समान कठोर बना दिया था. अंतत: विष्णुजी को मैदान छोड़कर जाना पड़ा. इस बीच श्रीदामा ने विष्णु पत्नी लक्ष्मी का हरण कर लिया. तब श्री विष्णु ने कैलाश पहुंचकर वहां पर भगवान शिव का पूजन किया और शिव नाम जपकर “शिवसहस्त्रनाम स्तोत्र” की रचना कर दी.



घर बैठे फ्री पैसे कमाने के लिए क्लिक करे यहाँ जाये

जब के साथ उन्होंने “हरिश्वरलिंग की स्थापना कर 1 ब्रह्मकमल अर्पित करने का संकल्प लिया. 999 ब्रह्मकमल अर्पित करने के बाद उन्होंने देखा की एक ब्रह्मकमल कहीं लुप्त हो गया है, तब उन्होंने अपना दाहिना नेत्र निकालकर ही शिवजी को अर्पित कर दिया. यह देख शिव जी प्रकट हो गए. शिवजी ने इच्‍छीत वर मांगने को कहा. तब श्री विष्णु ने लक्ष्मी के अपहरण की कथा सुनाई. तभी शिव की दाहिनी भुजा से महातेजस्वी सुदर्शन चक्र प्रकट हुआ. इसी सुदर्शन चक्र से भगवान विष्णु ने श्रीदामा का का नाश कर महालक्ष्मी को श्रीदामा से मुक्त कराया तथा देवों को दैत्य श्रीदामा के भय से मुक्ति दिलाई.

निचे कमेंट करके अपने राय जरुर बताये की आपको ये पोस्ट कैसी लगी

इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगो तक शेयर करे, और इस तरह के पोस्ट को पढने के लिए आप हमारी वेबसाइट विजिट करते रहे.

देखें, भगवान राम और श्री हनुमान की यह कथा आपने कभी नहीं सुनी होगी..

देखें, भगवान राम और श्री हनुमान की यह कथा आपने कभी नहीं सुनी होगी..

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि हनुमानजी ने रामेश्वरम के ज्योतिर्लिंग को एक बार उखाड़ना चाहा था लेकिन उस समय उनका अभिमान टूट गया था. जी हाँ, इस बारे में तमिल भाषा में महर्षि कम्बन की रामायण ‘इरामावतारम्’ लिखी है जिसमे एक कथा का उल्लेख मिलता है. आप सभी को बता दें कि यह कथा हमें वाल्मिकी रामायण और तुलसीदासकृत रामचरित मानस में नहीं मिलती है और वाल्मिकी रामायण के इतर भी रामायण काल की कई घटनाओं का जिक्र हमें इरामावतारम्, अद्भुत रामायण और आनंद रामायण में मिलता है. इसी में ऐसी एक कथा है रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापना की जिसका जिक्र स्कन्दपुराण में भी है वही आज हम आपको बताने जा रहे हैं.
आइए जानते हैं वह पौराणिक कथा.

पौराणिक कथा - इस कथा अनुसार जब भगवान श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त कर लौट रहे थे तो उन्होंने गंधमादन पर्वत पर विश्राम किया वहां पर ऋषि मुनियों ने श्री राम को बताया कि उन पर ब्रह्महत्या का दोष है जो शिवलिंग की पूजा करने से ही दूर हो सकता है। इसके लिए भगवान श्रीराम ने हनुमान से शिवलिंग लेकर आने को कहा। हनुमान तुरंत कैलाश पर पहुंचें लेकिन वहां उन्हें भगवान शिव नजर नहीं आए अब हनुमान भगवान शिव के लिए तप करने लगे उधर मुहूर्त का समय बीता जा रहा था। अंतत: भगवान शिवशंकर ने हनुमान की पुकार को सुना और हनुमान ने भगवान शिव से आशीर्वाद सहित एक अद्भुत शिवलिंग प्राप्त किया लेकिन तब तक देर हो चुकी मुहूर्त निकल जाने के भय से माता सीता ने बालु से ही विधिवत रूप से शिवलिंग का निर्माण कर श्री राम को सौंप दिया जिसे उन्होंने मुहूर्त के समय स्थापित किया।

जब हनुमान वहां पहुंचे तो देखा कि शिवलिंग तो पहले ही स्थापित हो चुका है इससे उन्हें बहुत बुरा लगा। तब उन्होंने श्रीराम से कहा कि ‘हे प्रभु! आपके आदेश पर मैं इतना श्रम कर ये शिवलिंग लाया हूं और आपने किसी और शिवलिंग की स्थापना कर ली। ये शिवलिंग भी तो केवल बालू का बना है इसी कारण ये अधिक समय तक नहीं टिक पाएगा जबकि मैं पाषाण से बना शिवलिंग लेकर आया हूं।’ श्रीराम हनुमान की भावनाओं को समझ रहे थे उन्होंने हनुमान को समझाया भी लेकिन वे संतुष्ट नहीं हुए तब श्रीराम ने कहा, ‘हे हनुमान! इसमें दुखी होने की कोई बात नहीं है किन्तु यदि तुम्हारी इच्छा हो तो इस शिवलिंग को हटा कर तुम अपने शिवलिंग की स्थापना कर दो। यदि तुम ऐसा कर सके तो हम तुम्हारे ही शिवलिंग की पूजा करेंगे।’ यह सुनकर हनुमानजी ने सोचा कि उनके एक प्रहार से तो पर्वत भी टूट कर गिर जाते हैं फिर ये रेत से बना शिवलिंग तो यूंही हट जाएगा।



घर बैठे फ्री पैसे कमाने के लिए क्लिक करे यहाँ जाये

इसी अहंकार की भावना से हनुमान उस शिवलिंग को हटाने का प्रयास करने लगे किन्तु आश्चर्य कि लाख प्रयासों के बाद भी हनुमान ऐसा न कर सके और अंतत: मूर्छित होकर गंधमादन पर्वत पर जा गिरे होश में आने पर उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ तो श्रीराम ने हनुमान द्वारा लाए शिवलिंग को भी नजदीक ही स्थापित किया और उसका नाम हनुमदीश्वर रखा। शिवलिंग स्थापित करने के बाद श्रीराम ने कहा, ‘मेरे द्वारा स्थापित किए गए ज्योतिर्लिंग की पूजा करने से पहले तुम्हारे द्वारा स्थापित किए गए शिवलिंग की पूजा करना आवश्यक होगा। जो ऐसा नहीं करेगा उसे महादेव के दर्शन का फल प्राप्त नहीं होगा।’ उसी समय से काले पाषाण से निर्मित हनुमदीश्वर महादेव का सबसे पहले दर्शन किया जाता है और उसके बाद रामेश्वरम का दर्शन करते हैं।उसी समय से काले पाषाण से निर्मित हनुमदीश्वर महादेव का सबसे पहले दर्शन किया जाता है और उसके बाद रामेश्वरम का दर्शन करते हैं।

निचे कमेंट करके अपने राय जरुर बताये की आपको ये पोस्ट कैसी लगी

इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगो तक शेयर करे, और इस तरह के पोस्ट को पढने के लिए आप हमारी वेबसाइट विजिट करते रहे.

Sunday, 3 February 2019

देखें, हर जन्म में धन-धान्य और संपदा का भरपूर सुख देती है षटतिला एकादशी की यह प्रामाणिक कथा..

देखें, हर जन्म में धन-धान्य और संपदा का भरपूर सुख देती है षटतिला एकादशी की यह प्रामाणिक कथा..

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

* षटतिला एकादशी की यह पौराणिक कथा करती हैं सर्वकामनाओं की पूर्ति

एक समय नारद जी ने भगवान श्रीविष्णु से प्रश्न किया कि प्रभु षट्तिला एकादशी की क्या कथा है और इस एकादशी को करने से कैसा पुण्य मिलता है, इस संबंध में भगवान विष्णु ने नारद जी से कहा कि- हे नारद! मैं तुमसे सत्य घटना कहता हूं। ध्यानपूर्वक सुनो।

कथा- प्राचीन काल में मृत्युलोक में एक ब्राह्मणी रहती थी। वह सदैव व्रत किया करती थी। एक समय वह एक मास तक व्रत करती रही। इससे उसका शरीर अत्यंत दुर्बल हो गया। यद्यपि वह अत्यंत बुद्धिमान थी तथापि उसने कभी देवताओं या ब्राह्मणों के निमित्त अन्न या धन का दान नहीं किया था।
इससे मैंने सोचा कि ब्राह्मणी ने व्रत आदि से अपना शरीर शुद्ध कर लिया है, अब इसे विष्णुलोक तो मिल ही जाएगा परंतु इसने कभी अन्न का दान नहीं किया, इससे इसकी तृप्ति होना कठिन है।

भगवान ने आगे कहा- ऐसा सोचकर मैं भिखारी के वेश में मृत्युलोक में उस ब्राह्मणी के पास गया और उससे भिक्षा मांगी। वह ब्राह्मणी बोली- महाराज किसलिए आए हो? मैंने कहा- मुझे भिक्षा चाहिए। इस पर उसने एक मिट्टी का ढेला मेरे भिक्षापात्र में डाल दिया। मैं उसे लेकर स्वर्ग में लौट आया।

कुछ समय बाद ब्राह्मणी भी शरीर त्याग कर स्वर्ग में आ गई। उस ब्राह्मणी को मिट्टी का दान करने से स्वर्ग में सुंदर महल मिला, परंतु उसने अपने घर को अन्नादि सब सामग्रियों से शून्य पाया। घबरा कर वह मेरे पास आई और कहने लगी कि भगवन् मैंने अनेक व्रत आदि से आपकी पूजा की, परंतु फिर भी मेरा घर अन्नादि सब वस्तुओं से शून्य है। इसका क्या कारण है?



घर बैठे फ्री पैसे कमाने के लिए क्लिक करे यहाँ जाये

इस पर मैंने कहा- पहले तुम अपने घर जाओ। देवस्त्रियां आएंगी तुम्हें देखने के लिए। पहले उनसे षटतिला एकादशी का पुण्य और विधि सुन लो, तब द्वार खोलना। मेरे ऐसे वचन सुनकर वह अपने घर गई। जब देवस्त्रियां आईं और द्वार खोलने को कहा तो ब्राह्मणी बोली- आप मुझे देखने आई हैं तो षटतिला एकादशी का माहात्म्य मुझसे कहो।

उनमें से एक देवस्त्री कहने लगी कि मैं कहती हूं। जब ब्राह्मणी ने षटतिला एकादशी का माहात्म्य सुना तब द्वार खोल दिया। देवांगनाओं ने उसको देखा कि न तो वह गांधर्वी है और न आसुरी है वरन पहले जैसी मानुषी है। उस ब्राह्मणी ने उनके कथनानुसार षटतिला एकादशी का व्रत किया। इसके प्रभाव से वह सुंदर और रूपवती हो गई तथा उसका घर अन्नादि समस्त सामग्रियों से युक्त हो गया। अत: मनुष्यों को मूर्खता त्याग कर षटतिला एकादशी का व्रत और लोभ न करके तिलादि का दान करना चाहिए। इससे दुर्भाग्य, दरिद्रता तथा अनेक प्रकार के कष्ट दूर होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

निचे कमेंट करके अपने राय जरुर बताये की आपको ये पोस्ट कैसी लगी

इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगो तक शेयर करे, और इस तरह के पोस्ट को पढने के लिए आप हमारी वेबसाइट विजिट करते रहे.

देखें, बाली ने श्रीराम से इस तरह लिया था अपनी मौत का बदला..

देखें, बाली ने श्रीराम से इस तरह लिया था अपनी मौत का बदला..

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

वानर राज बालि किष्किंधा का राजा और सुग्रीव का बड़ा भाई था। बालि का विवाह वानर वैद्यराज सुषेण की पुत्री तारा के साथ संपन्न हुआ था। तारा एक अप्सरा थी। बालि के पिता का नाम वानरश्रेष्ठ ‘ऋक्ष’ था। बालि के धर्मपिता देवराज इन्द्र थे। बालि का एक पु‍त्र था जिसका नाम अंगद था। बालि गदा और मल्ल युद्ध में पारंगत था। उसमें उड़ने की शक्ति भी थी। धरती पर उसे सबसे शक्तिशाली माना जाता था।

रामायण के अनुसार बालि को उसके धर्मपिता इन्द्र से एक स्वर्ण हार प्राप्त हुआ था। इस हार की शक्ति अजीब थी। इस हार को ब्रह्मा ने मंत्रयुक्त करके यह वरदान दिया था कि इसको पहनकर बालि जब भी रणभूमि में अपने दुश्मन का सामना करेगा तो उसके दुश्मन की आधी शक्ति क्षीण हो जाएगी और यह आधी शक्ति बालि को प्राप्त हो जाएगी।
इस कारण से बालि लगभग अजेय था।

बालि ने अपनी शक्ति के बल पर दुदुंभी, मायावी और रावण को परास्त कर दिया था। बालि ने अपने भाई सुग्रीव की पत्नी को हड़पकर उसको बलपुर्वक अपने राज्य से बाहर निकाल दिया था। हनुमानजी ने सुग्रीव को प्रभु श्रीराम से मिलाया। सुग्रीव ने अपनी पीड़ा बताई और फिर श्रीराम ने बालि को छुपकर तब तीर से बार दिया जबकि बालि और सुग्रीव में मल्ल युद्ध चल रहा था।

चूंकि प्रभु श्रीराम ने कोई अपराध नहीं किया था लेकिन फिर भी बालि के मन में यह दंश था कि उन्होंने मुझे छुपकर मारा। जब प्रभु श्रीराम ने कृष्ण अवतार लिया तब इसी बालि ने जरा नामक बहेलिया के रूप में नया जन्म लेकर प्रभाव क्षेत्र में विषयुक्त तीर से श्रीकृष्ण को हिरण समझकर तब मारा जब वे एक पेड़ के नीचे योगनिद्रा में विश्राम कर रहे थे।

दरअसल, श्रीकृष्‍ण ने द्वारिका में अपना निवास जगह बनाया और सोमनाथ के पास स्थित प्रभास क्षेत्र में उन्होंने देह छोड़ दी। भगवान कृष्ण इसी प्रभास क्षेत्र में अपने कुल का नाश देखकर बहुत व्यथित हो गए थे। वे तभी से वहीं रहने लगे थे। एक दिन वे एक वृक्ष के नीचे विश्राम कर रहे थे तभी किसी बहेलिये ने उनको हिरण समझकर तीर मार दिया। यह तीर उनके पैरों में जाकर लगा और तभी उन्होंने देह त्यागने का निर्णय ले लिया।



घर बैठे फ्री पैसे कमाने के लिए क्लिक करे यहाँ जाये

पौराणिक मान्यताओं अनुसार प्रभु ने त्रेता में राम के रूप में अवतार लेकर बाली को छुपकर तीर मारा था। कृष्णावतार के समय भगवान ने उसी बाली को जरा नामक बहेलिया बनाया और अपने लिए वैसी ही मृत्यु चुनी, जैसी बाली को दी थी।

प्रभास क्षेत्र काठियावाड़ के समुद्र तट पर स्थित बीराबल बंदरगाह की वर्तमान बस्ती का प्राचीन नाम है। यह एक प्रमुख तीर्थ जगह है। महाभारत के अनुसार यह सरस्वती-समुद्र संगम पर स्थित प्रसिद्ध तीर्थ था- ‘समुद्रं पश्चिमं गत्वा सरस्वत्यब्धि संगमम्’। (1). यह विशिष्ट स्थल या देहोत्सर्ग तीर्थ नगर के पूर्व में हिरण्या, सरस्वती तथा कपिला के संगम पर बताया जाता है। इसे प्राची त्रिवेणी भी कहते हैं। इसे भालका तीर्थ भी कहते हैं।

पांच वर्ष की असहनीय पीड़ा के बाद उस भील जरा को अहसास हो गया कि उसने किसी आम आदमी को नहीं मारा बल्कि मानव की देह धारण करके पृथ्वी पर आए साक्षात भगवान की देह अपने तीर से छीन ली है। वापस उसी जगह पर जाकर ‘गोविंद गोविंद’ कहते हुए उस बहेलिए ने समुद्र में समाकर अपने प्राण त्याग दिए। जिस जगह पर जरा ने श्रीकृष्ण को तीर मारा, उसे आज ‘भालका’ तीर्थ कहा जाता है। वहां बने मंदिर में वृक्ष के नीचे लेटे हुए कृष्ण की आदमकद प्रतिमा है। उसके समीप ही हाथ जोड़े जरा खड़ा हुआ है।

निचे कमेंट करके अपने राय जरुर बताये की आपको ये पोस्ट कैसी लगी

इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगो तक शेयर करे, और इस तरह के पोस्ट को पढने के लिए आप हमारी वेबसाइट विजिट करते रहे.

देखें, इस वर्ष 10 फरवरी को है वसंत पंचमी, रविसिद्धियोग में होगी सरस्वती पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त..

देखें, इस वर्ष 10 फरवरी को है वसंत पंचमी, रविसिद्धियोग में होगी सरस्वती पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त..

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

सरस्वती महामाये शुभे कमललोचिनी. विश्वरूपी विशालाक्षी . विद्यां देहि परमेश्वरी. । माघ शुक्ल पंचमी रविवार 1 फरवरी को विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा होगी। इसी दिन मां सरस्वती का अवतार माना जाता है। सरस्वती ब्रह्म की शक्ति के रूप में भी जानी जाती हैं। नदियों की देवी के रूप में भी इनकी पूजा की जाती है।

इस वर्ष सरस्वती पूजा पर ग्रह-गोचरों का महासंयोग बन रहा है। सरस्वती पूजा पर रविवार, रवि सिद्धियोग,अबूझ नक्षत्र और 1 तारीख का महासंयोग बन रहा है। माघ शुक्ल पंचमी शनिवार 9 फरवरी की दोपहर 12.25 बजे से शुरू होगा जो रविवार 1 फरवरी को दोपहर 2.8 बजे तक है। पूजन के समय अबूझ नक्षत्र का भी संयोग बना है।
पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 6.4 बजे से दोपहर 12.12 बजे तक है।
सरस्वती पूजा पर मंत्र दीक्षा, नवजात शिशुओं का विद्या आरंभ भी किया जाता है। इस तारीख पर मां सरस्वती के साथ गणेश, लक्ष्मी और पुस्तक-लेखनी की पूजा अति फलदायी मानी जाती है। इसी दिन से फाग गीत ग्रामीण इलाकों में गाए जाने लगते हैं। लोग अबीर-गुलाल भी लगाना शुरू कर देते हैं।



घर बैठे फ्री पैसे कमाने के लिए क्लिक करे यहाँ जाये

निचे कमेंट करके अपने राय जरुर बताये की आपको ये पोस्ट कैसी लगी

इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगो तक शेयर करे, और इस तरह के पोस्ट को पढने के लिए आप हमारी वेबसाइट विजिट करते रहे.

PM मोदी ने इशारों में किया कांग्रेस पर वार- ‘वो कौन पंजा था जो खजाना खाली कर गया’

PM मोदी ने इशारों में किया कांग्रेस पर वार- ‘वो कौन पंजा था जो खजाना खाली कर गया’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को जम्‍मू और कश्‍मीर के दौरे पर हैं. सुबह उन्‍होंने लेह पहुंचकर एयरपोर्ट की नई टर्मिनल बिल्डिंग का शिलान्‍यास किया. इसके बाद उन्‍होंने जम्‍मू के विजयपुर पहुंचकर कई परियोजनाओं का शिलान्‍यास और उद्घाटन किया.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जम्मू-कश्मीर दौर के एक दिवसीय दौरे पर हैं। उन्होंने यहां जम्मू में महारैली को संबोधित करते हुए कहा कि मां वैष्णों की छत्रछाया में जम्मू में एक बार फिर आना, मेरे लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने आगे कहा कि मैं जब भी यहां आता हूं तो यहां की उर्जा मुझे और ज्यादा शक्ति से अपना काम करने को प्रेरित करती है। आपका यही स्नेह मुझे इस बात का एहसास दिलाता रहता है कि मुझे लगातार काम करना है, आपकी आशाओं, अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए मेहनत करनी है

पीएम मोदी ने आगे राज्य हो रहे विकास कार्य का जिक्र करते हुए कहा कि जम्मू में बनने वाला एम्स, इंजीनियरिंग कॉलेज, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन का नया कैंपस, इंफ्रास्ट्रक्चर के अन्य प्रोजेक्ट्स, यहां के लोगों के जीवन को सरल और सुगम बनाने में मदद करेंगे। ये जो 75 बेड का अत्याधुनिक एम्स यहां बनने जा रहा है, इससे जम्मू वासियों को उत्तम स्वास्थ्य सेवाएं तो मिलेंगी ही, शहर के दूसरे मेधावी छात्रों के लिए अनेक नए अवसर भी बनेंगे।।

राज्य में स्वास्थ सेवाओं का तेजी से विस्तार का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि एम्स के साथ-साथ अनंतनाग, बारामूला, डोडा, कठुआ और रजौरी में पांच मेडिकल कालेजों को बनाने का काम तेजी से चल रहा है। इन कालेजों में जल्द ही पढ़ाई भी शुरु होगी। इसका मतलब होगा कि राज्य में MBBS की 5 सौ सीटें और बढ़ जाएंगी।

‘सरकार कश्‍मीरी पंडितों के साथ’
पीएम मोदी ने कहा ‘केंद्र की सरकार मेरे कश्मीरी पंडित, कश्मीरी विस्थापित भाइयों और बहनों के अधिकारों, उनके सम्मान और उनके गौरव के लिए समर्पित है, प्रतिबद्ध है. प्रधानमंंत्री ने कहा कि हमारी सरकार नागरिकता कानून में संशोधन का प्रस्ताव लाई है. ये उस संकल्प का भाग है, जिसके द्वारा हम उन सभी लोगों के साथ खड़े रहेंगे, जो कभी भारत का भाग थे और 1947 में बनी परिस्थितियों के चलते हमसे अलग हो गए.

उन्‍होंने कहा कि मां वैष्णो की छत्रछाया में जम्मू में एक बार फिर आना, मेरे लिए सौभाग्य की बात है. जम्मू और कश्मीर में पिछले 7 साल में 5 एमबीबीएस सीटें थीं, जो भाजपा सरकार के प्रयास से अब दोगुनी होने वाली हैं. दूर-दराज के इलाकों को जोड़ने, यहां की सड़क नेटवर्क को सुधारने के लिए भाजपा सरकार ने प्रधानमंत्री विकास पैकेज में 4 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार युवाओं को समान अवसर देने के लिए समर्पित है. हाल में ही सरकारी सेवाओं और शिक्षण संस्थानों में गरीब सामान्य वर्ग के युवाओं को 1 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला लिया गया है. मैं जब भी यहां आता हूं तो यहां की उर्जा मुझे और ज्यादा शक्ति से अपना काम करने को प्रेरित करती है.

‘विपक्ष का चेहरा लटका हुआ था’
पीएम मोदी ने 1 फरवरी को पेश हुए बजट को देश के विकास के लिए बेहतर बजट बताया. उन्होंने कहा कि अब 75 हजार करोड़ रुपये अब सीधे किसानों के खाते में जाएंगे. अब किसानों के खाते में सीधे 6 हजार रुपये जाएंगे. परसों जब हमारे वित्त मंत्री बजट पढ़ रहे थे तो विपक्ष का चेहरा लटका हुआ था, वो अपना होश गवां बैठे थे.

‘आपकी सुरक्षा के लिए हरसंभव कोशिश जारी’
हर शहीद के परिवार को विश्वास दिलाता हूं कि देश की सरकार आपके साथ, हर कदम पर खड़ी रहेगी. मैं सीमा पार से गोलाबारी का सामना कर रहे परिवारों को भी आश्वस्त करता हूं कि उनकी सुरक्षा के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है. एक तरफ तो दुश्मन को करारा जवाब दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सीमा पर 14 हजार बंकर बनाए जा रहे हैं, ताकि आप सभी सुरक्षित रह सकें.



घर बैठे फ्री पैसे कमाने के लिए क्लिक करे यहाँ जाये

पढ़ें, पीएम मोदी के भाषण के मुख्य बातें।।।

  • जम्मू-कश्मीर में पिछले 7 साल में 5 सौ ही MBBS की सीटें थीं, जो भाजपा सरकार के प्रयास के बाद अब दोगुनी से भी अधिक होने वाली है
  • एम्स, मेडिकल कॉलेज के अलावा कठुआ का इंजीनियरिंग कॉलेज और जम्मू में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन का नया कैंपस, यहां के युवा साथियों को प्रोफेशनल एजुकेशन के नए अवसर देने वाले हैं:
  • केंद्र सरकार युवाओं को समान अवसर देने के लिए समर्पित है। हाल में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए शिक्षा और सरकारी सेवाओं में सामान्य वर्ग के गरीब युवाओं को 1 प्रतिशत आरक्षण देने का काम किया गया है।
  • इससे जम्मू के भी अनेक मेधावी गरीब युवा साथियों को लाभ होने वाला है। इसके अलावा सरकार देशभर के शैक्षिक संस्थानों में करीब-करीब 25 प्रतिशत सीटों में भी वृद्धि करने जा रही है।
  • जम्मू में यातायात और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत किया जा रहा है। दूर-दराज के इलाकों को जोड़ने, यहां की सड़क नेटवर्क को सुधारने के लिए भाजपा सरकार ने प्रधानमंत्री विकास पैकेज में 4 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है
  • जम्मू में कनेक्टिविटी के साथ-साथ इलेक्ट्रिसिटी का इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत किया जा रहा है। किश्तवाड़ में चेनाब पर जो हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट बनेगा उससे जम्मू कश्मीर की बिजली की जरुरतें तो पूरी होंगी ही, यहां के हजारों युवाओं को रोजगार भी मिलेगा
  • सरकार ने रातले हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट को चलाने के लिए भी व्यवस्था कर ली है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही राज्य को साढ़े 8 सौ मेगावाट अतिखाली बिजली मिलेगी
  • ऐसा ही एक प्रोजेक्ट पिछले चालीस साल से लटका हुआ था। शाहपुर कंदी बांध परियोजना पर भी अब जम्मू-कश्मीर ने पंजाब के साथ समझौता कर लिया है। इससे राज्य को बिजली तो मिलेगी साथ ही, सांबा और कठुआ जिलों की 32 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के दायरे में भी लाया जा सकेगा..
  • पहले की सरकारों का देश की आवश्यकताओं और भावनाओं को नजरअंदाज करने का रवैया बहुत पुराना है। अब करतारपुर कारिडोर की बात ही ले लीजिए। अगर ध्यान गया होता तो आज हमारे गुरु नानक की भूमि हमारे देश में होती
  • इसी तरह पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में ऐसे अनेक मां भारती की संतानें हैं जिनके साथ अत्याचार हुआ है। हमारे इन भाइयों बहनों की पीड़ा पर भी किसी ने ध्यान नहीं दिया। हम एक संकल्प के साथ नागरिकता कानून में संशोधन का प्रस्ताव लाए हैं
  • नागरिकता कानून में संशोधन का प्रस्ताव लाए हैं। ये देश के उस संकल्प का भाग है जिसके मुताबिक हम उन सभी लोगों के साथ खड़े रहेंगे, जो कभी भारत का भाग थे लेकिन 1947 में बनी परिस्थितियों के चलते हमसे अलग हो गए
  • अब अगर उनका आस्था के आधार पर शोषण होता है तो उनके साथ देश को खड़ा होना ज़रूरी है। इन सभी लोगों के हकों की रक्षा के लिए भारत हमेशा खड़ा रहेगा, न्याय और जीवन के उनके अधिकारों की रक्षा की जाएगी.
  • आज इस अवसर पर मैं एक और बहुत ही महत्वपूर्ण विषय, बहुत ही भावनात्मक विषय पर बात करना चाहता हूं। ये विषय है मेरे कश्मीरी पंडित, कश्मीरी विस्थापित भाइयों औऱ बहनों का। केंद्र की सरकार उनके अधिकार, उनके सम्मान, उनके गौरव के लिए समर्पित है, प्रतिबद्ध है
  • हिंसा और आतंकवाद के जिस दौर में उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा, जो यातनाएं सहनी पड़ीं, वो हिंदुस्तान कभी नहीं भूल सकता। मैं हर अवसर पर कहता नहीं हूं, लेकिन वो पीड़ा मेरे मन में हमेशा रही है
  • जब हम सरकार में गठबंधन में थे, तो बहुत सी चीजें हो नहीं पाईं थीं। हम लोग बहुत प्राथमिकता दे रहे थे राज्य में पंचायत चुनाव को। लेकिन तब वो संभव नहीं हो पाया:

Web Title : Jammu: PM Modi made gestures on Congress

घर बैठे फ्री में पैसे कमाने के लिए अभी देख - यहाँ कमाये

इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगो तक शेयर करे, और इस तरह के पोस्ट को पढने के लिए आप हमारी वेबसाइट विजिट करते रहे.

देखें, भगवान विष्णु के सिर्फ यह 10 मंत्र, करेंगे हर संकट का अंत…

देखें, भगवान विष्णु के सिर्फ यह 10 मंत्र, करेंगे हर संकट का अंत…

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु जगत का पालन करने वाले देवता हैं। उनका स्वरूप शांत और आनंदमयी है। प्रतिदिन भगवान श्रीहरि विष्णु का स्मरण करने से जीवन के समस्त संकटों का नाश होता है तथा धन-वैभव की प्राप्ति होती है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं श्रीहरि विष्णु के 1 सरलतम मंत्र, जिनका जाप कर धन-वैभव एवं संपन्नता पाई जा सकती हैं।

श्रीहरि विष्णु के पावन मंत्र.

1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

2. श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।


हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।

3. ॐ नारायणाय विद्महे।

वासुदेवाय धीमहि।

तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।

4. ॐ विष्णवे नम:

5. ॐ हूं विष्णवे नम:

* धन-वैभव एवं संपन्नता पाने का विशेष मंत्र

6. ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।



घर बैठे फ्री पैसे कमाने के लिए क्लिक करे यहाँ जाये

ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।

* लक्ष्मी विनायक मंत्र -

7.
दन्ताभये चक्र दरो दधानं,

कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।

धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया

लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।

* सरल जाप मंत्र -

8. ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।

* विष्णु के पंचरूप मंत्र -

9. - ॐ अं वासुदेवाय नम: - ॐ आं संकर्षणाय नम: - ॐ अं प्रद्युम्नाय नम: - ॐ अ: अनिरुद्धाय नम: - ॐ नारायणाय नम: 1. ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान। यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्‍टं च लभ्यते।।

निचे कमेंट करके अपने राय जरुर बताये की आपको ये पोस्ट कैसी लगी

इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगो तक शेयर करे, और इस तरह के पोस्ट को पढने के लिए आप हमारी वेबसाइट विजिट करते रहे.

देखें, सोमवती (मौनी) अमावस्या पर करें ये 9 उपाय, बदल जाएगा आपका भाग्य..

देखें, सोमवती (मौनी) अमावस्या पर करें ये 9 उपाय, बदल जाएगा आपका भाग्य..

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

तंत्र शास्त्र में मौनी अमावस्या यानी माघ कृष्ण अमावस्या को विशेष तारीख माना गया है। इस संबंध में मान्यता है कि इस दिन किए गए उपाय विशेष ही शुभ फल प्रदान करते हैं, जैसे इस दिन भूखे प्राणियों को भोजन कराने का भी विशेष महत्व है।

आइए जानें मौनी अमावस्या के किन उपायों से मिलेंगे जीवन में सभी शुभ फल, पढ़ें 9 सरलतम उपाय.

1. मौनी सोमवती अमावस्या के दिन चींटियों को शकर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से आपके पाप-कर्मों का क्षय होगा और पुण्य-कर्म उदय होंगे। यही पुण्य-कर्म आपकी मनोकामना पूर्ति में सहायक होंगे।

2. माघ मास में तिल के दान का महत्व अधिक होने से चतुर्दशी और अमावस्या की तारीख विशेष मानी गई है।
पितरों की प्रसन्नता, सद्‌गति तथा पोस्टवृद्धि के लिए काले तिल से तर्पण करना विशेष लाभदायी रहता है।

3. गाय को आटे में तिल मिलाकर रोटी बनाएं और वह गाय को खिलाने से घर-परिवार में सुख-शांति आएगी।

4. शाम के समय घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक लगाएं। बत्ती में रूई के जगह पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें। साथ ही दीये में थोड़ी-सी केसर भी डाल दें। यह मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का उपाय है।



घर बैठे फ्री पैसे कमाने के लिए क्लिक करे यहाँ जाये

5. लक्ष्मी जी, शिव परिवार को चावल की खीर अर्पित करें धन-संपत्ती से भंडार भरेंगे।

6. इस दिन दूध में अपनी छाया देखकर काले कुत्ते को पिलाएं। इस उपाय से सभी तरह की मानसिक परेशानियां दूर होंगी।

7. मौनी अमावस्या पर कालसर्प दोष निवारण हेतु सुबह स्नान के बाद चांदी से निर्मित नाग-नागिन की पूजा करें। सफेद पुष्प के साथ इसे बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। कालसर्प दोष से राहत पाने का ये अचूक उपाय है।

8. सूखे कुएं में दूध बहाएं, सेहत ठीक रहेगी। रोग कोसों दूर रहेंगे। 9. इस दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद आटे की गोलियां बनाएं। गोलियां बनाते समय भगवान का नाम लेते रहें। इसके बाद समीप स्थित किसी तालाब या नदी में जाकर ये आटे की गोलियां मछलियों को खिला दें। इस उपाय से आपके जीवन की अनेक परेशानियों का अंत हो सकता है।

निचे कमेंट करके अपने राय जरुर बताये की आपको ये पोस्ट कैसी लगी

इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगो तक शेयर करे, और इस तरह के पोस्ट को पढने के लिए आप हमारी वेबसाइट विजिट करते रहे.

देखें, रुक्मणि के अलावा श्रीकृष्ण ने उज्जैन की राजकुमारी का भी किया था हरण..

देखें, रुक्मणि के अलावा श्रीकृष्ण ने उज्जैन की राजकुमारी का भी किया था हरण..

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

प्रतीकात्मक चित्र

मित्रविन्दा और श्रीकृष्ण के विवाह के संबंध में दो कथाएं मिलती है। पहली कथा के अनुसार मित्रविन्दा भी रुक्मणि की तरह मन ही मन श्रीकृष्ण से प्रेम करने लगी थी। उसके भाई विन्द और अनुविन्द उसका विवाह दुर्योधन से करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने रीति रिवाज के अनुसार स्वयंवर का आयोजन किया और बहन को समझाया कि वरमाला दुर्योधन के गले में ही डाले।

कहते हैं कि श्रीकृष्ण और मित्रविन्दा में पहले से ही प्रेम था। अत: कृष्ण भी मित्रविन्दा के स्वयंवर में पहुंचे और जब कृष्ण को इस बात का पता चला की बलपूर्वक दुर्योधन के गले में वरमाला डलवाई जाएगी तो उन्होंने भरी सभा में मित्रवन्दा का हरण किया और विन्द एवं अनुविन्द को पराजित कर मित्रविन्दा को द्वारिका ले गए।
वहां उन्होंने विधिवत रूप से मित्रविन्दा से विवाह किया।

दूसरी कथा के अनुसार विन्द और अनुविन्द ने स्वयंवर आयोजित किया तो इस बात की खबर बलराम को भी चली। स्वयंवर में रिश्तेदार होने के बावजूद भी भगवान कृष्ण और बलराम को न्योता नहीं था। बलराम को इस बात पर क्रोध आया। बलराम ने कृष्ण को बताया कि स्वयंवर तो एक ढोंग है। मित्रविन्दा के दोनों भाई उसका विवाह दुर्योधन के साथ करना चाहते हैं। दुर्योधन भी ऐसा करके अपनी शक्ति बढ़ाना चाहता है। युद्ध में अवंतिका के राजा दुर्योधन को ही समर्थन देंगे। बलराम ने कृष्ण को यह भी बताया कि मित्रविन्दा तो आपसे प्रेम करती है फिर आप क्यों नहीं कुछ करते हो?&ampgt

यह सुनकर भगवान कृष्ण अपनी बहन सुभद्रा के साथ अवंतिका पहुंचे। उनके साथ बलराम भी थे। उन्होंने सुभद्रा को मित्रविन्दा के पास भेजा यह पुष्टि करने के लिए कि मित्रविन्दा उन्हें चाहती है या नहीं। मित्रविन्दा ने सुभद्रा को अपने मन की बात बता दी। मित्रविन्दा के प्रेम की पुष्टि होने के बाद कृष्ण और बलराम ने स्वयंवर स्थल पर धावा बोल दिया और मित्रविन्दा का हरण करके ले गए। इस दौरान उनको दुर्योधन, विन्द और अनुविन्द से युद्ध करना पड़ा। सभी को पराजित करने के बाद वे मित्रविन्दा को द्वारिका ले गए और वहां जाकर उन्होंने विधिवत विवाह किया।&ampgt



घर बैठे फ्री पैसे कमाने के लिए क्लिक करे यहाँ जाये

मित्रविन्दा और कृष्ण के 1 पुत्र और 1 पुत्री थी। दस पुत्रों के नाम- वृक, हर्ष, अनिल, गृध, वर्धन, आनन्द, महाश, पावन, वहि और क्षुधि। पुत्री का नाम शुचि था। कहते हैं कि श्रीकृष्ण के देहत्याग के बाद मित्रविन्दा सती हो गई थी। बाद में उसके पुत्र अर्जुन के साथ हस्तिनापुर जाते वक्त रास्ते में लुटेरों द्वारा मारे गई थे।

कहते हैं कि मित्रविन्दा कृष्ण की बुआ राज्याधिदेवी की कन्या थी। राज्याधिदेवी की बहिन कुंति थी। इसका मतलब यह कि मित्रविन्दा श्रीकृष्ण की चचेरी बहिन थी। मित्रविन्दा अवंतिका (उज्जैन) के राजा जयसेन की पुत्री और विन्द एवं अनुविन्द की सगी बहन थी।

निचे कमेंट करके अपने राय जरुर बताये की आपको ये पोस्ट कैसी लगी

इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगो तक शेयर करे, और इस तरह के पोस्ट को पढने के लिए आप हमारी वेबसाइट विजिट करते रहे.

देखें, प्रियंका चोपड़ा ने पिछले दो साल के हॉलीवुड में धाक जमा रखी है और अब वो फिर से तैयार हैं..

देखें, प्रियंका चोपड़ा ने पिछले दो साल के हॉलीवुड में धाक जमा रखी है और अब वो फिर से तैयार हैं..

आज एक बार फिर मै कुछ मनोरंजन एवं बॉलीवुड से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

प्रियंका चोपड़ा ने पिछले दो साल के हॉलीवुड में धाक जमा रखी है और अब वो फिर से तैयार हैं अपनी नई फिल्म इज़ट इट रोमांटिक के साथ जिसे रिलीज़ के बाद वेब पर भी रिलीज़ कर दिया जाएगा । लेकिन अब जो ख़बर हम आपको बताने जा रहे हैं उससे आपको झटका लगने वाला है।

हॉलीवुड की इस फिल्म के निर्माता ने फैसला किया है कि प्रियंका चोपड़ा स्टारर इस फिल्म को भारत ने रिलीज़ नहीं किया जाएगा। इज़ट इट रोमांटिक, 13 फरवरी को रिलीज़ हो रही लेकिन भारत में नहीं। उस दिन फिल्म को यू के और अमेरिका में रिलीज़ किया जाएगा। प्रियंका की ये फिल्म 28 फरवरी से नेटफ्लिक्स के जरिये दिखाई जायेगी l नेटफ्लिक्स ने इसे अमेरिका और कनाडा को छोड़ कर दुनिया के बाकी भागों में रिलीज़ करने के फैसला किया है, जिसमें स्पेन, फ़्रांस और इटली भी शामिल हैंl इस फिल्म में उनके साथ रेबेल विल्सन, लीमा हेमस्वर्थ और एडम डेविन ने काम किया है l

इज़ंट इट रोमांटिक, हॉलीवुड की एक रोमांटिक कॉमेडी है, जिसे टॉड स्ट्रॉस शुल्सन डायरेक्ट कर रहे हैं।
फिल्म में प्रियंका योग दूत बन कर लिआम हेम्सवर्थ और रिबेल विल्सन जैसे कलाकारों के साथ काम कर रही हैं। न्यूयार्क शहर की एक वास्तुकार नटाली की जिंदगी पर आधारित इस फिल्म को लेकर जबरदस्त चर्चा है। प्रियंका चोपड़ा ने निक जोनास से शादी के बाद हनीमून के छुट्टियां भी मना ली है और जल्द ही फिल्म द स्काई इज़ पिंक की शूटिंग में जुट जायेंगी। एक रियर डिज़ीज से ग्रसित लड़की की कहानी पर बनी इस फिल्म में ज़ाहिर वसीम वो रोल निभा रही हैं। फिल्म में फरहान अख्तर भी हैं।



घर बैठे फ्री पैसे कमाने के लिए क्लिक करे यहाँ जाये

प्रियंका ने इसके अलावा को फिल्म ऑफिशियल साइन नहीं की है। कुछ समय पहले प्रियंका ने एक मैग्जीन के इंटरव्यू में कहा था कि भगवान की इच्छा के आगे इंसान की कुछ नहीं चलती l इसलिए मैं कोई चांस नहीं लेना चाहतीl हमारे बच्चे जरुर होंगे लेकिन समय आने पर l ये होगा जरूर लेकिन अगले दस साल के भीतर या शायद उससे पहले भी l मुझे बच्चों से बहुत प्यार है और मुझे माँ बनना है l

निचे कमेंट करके अपने राय जरुर बताये की आपको ये पोस्ट कैसी लगी

इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगो तक शेयर करे, और इस तरह के पोस्ट को पढने के लिए आप हमारी वेबसाइट विजिट करते रहे.

Saturday, 2 February 2019

देखें, जब मृत्यु देव यमराज और अर्जुन के मध्य हुआ भीषण युद्ध..

देखें, जब मृत्यु देव यमराज और अर्जुन के मध्य हुआ भीषण युद्ध..

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

बहुत कम लोग पौराणिक कथाओं से वाकिफ हैं. ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे समय की बात जब मृत्यु के देव यमराज और अर्जुन के मध्य हुआ भीषण युद्ध हुआ था और उसका परिणाम जो हुआ था वह जानकार सभी हैरान रह गये थे. आइए जानते है वह कथा.

पौराणिक कथा - एक बार अर्जुन को अपने धनुर्विद्या पर बहुत घमंड हो चुका था वह सोचने लगे की इस दुनिया में कोई भी उनके समान धनुधर नहीं है. अर्जुन के इस अभिमान को भगवान श्री कृष्ण समझ गए परन्तु वे अर्जुन से कुछ बोले नहीं. भगवान श्री कृष्ण सिर्फ उचित समय का इन्तजार करने लगे. एक दिन भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को अपने साथ भ्रमण के लिए ले गए, मार्ग में उन्होंने एक कुटिया देखि जहाँ से रोने की आवाजे आ रही थी.
भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन ने उस कुटिया के भीतर प्रवेश किया तो पाया की एक ब्राह्मण एवम ब्राह्मणी अपने मृत बच्चे को हाथ में लिए रो रहे थे. वासुदेव श्री कृष्ण को देख ब्राह्मणी उनके समीप आयी तथा रोते हुए अपनी व्यथा सुनाते हुए बोली हे प्रभु मेरी जब भी कोई सन्तान जन्म लेती है तो वह जन्म के समय पश्चात ही मृत्यु को प्राप्त हो जाती है. हे प्रभु ! क्या हम सारे जीवन सन्तान हीन ही रहेंगे..

भगवान श्री कृष्ण उस ब्राह्मणी को समझाते हुए बोले की ये सब तो नियति का खेल है उसके आगे हम कुछ नहीं कर सकते.भगवान श्री कृष्ण के समीप ही अर्जुन खड़े थे, अपने धनुर्विद्या के अभिमान में डूबे अर्जुन उस ब्राह्मीन से बोले तुम्हे अब और दुःख सहने की कोई जरूरत नहीं है, में स्वयं तुम्हारे पुत्रो के रक्षा करूँगा. इसके बाद अर्जुन उस ब्राह्मीन के पति से बोले की इस बार तुम अपनी पत्नी के प्रसव के समय मुझे बुला लेना देखता कैसे यमराज तुम्हारे बच्चे के प्राण हरते है. अभिमान में डूबे अर्जुन ऐसा कहकर भगवान श्री कृष्ण के साथ वापस हस्तिनापुर की ओर लोट चले. जब उस ब्राह्मण की पत्नी के प्रसव का समय आया तो इस बार भी यमराज उन ब्राह्मण दम्पतियो के प्राण हर के चले गए.

ब्राह्मण दौड़ा-दौड़ा अर्जुन के पास गया और अपनी पूरी व्यथा उन्हें सुनाई. अर्जुन उस ब्राह्मण से बोले तुम चिंता न करो में तुम्हारी सन्तान को यमराज से वापस लेकर ही आऊंगा. अगर में ऐसा करने में सफल न हुआ तो आत्मदाह कर लूंगा. अर्जुन उस ब्राह्मण की सनातन को बचाने यमलोग पहुचे तथा यमराज को युद्ध के लिए चुनोती दी. यमराज एवम अर्जुन के मध्य बहुत भयंकर युद्ध हुआ, दोनों ने एक से बढ़कर एक शस्त्रो एवम अश्त्रों का प्रयोग किया. परन्तु यद्ध का कोई परिणाम नहीं निकल रहा था. तब यमराज ने अपने पिता सूर्य देव का ध्यान करते हुए अपना यमपाश अर्जुन पर चलाया जिसका वार इतना घातक था की अर्जुन के तीर भी उन्हें नहीं बचा पाए. और वे मूर्छित होकर सीधे धरती पर आ गिरे. जब अर्जुन की मूर्छा टूटी तो उन्होंने अपने प्रतिज्ञा की याद आयी.



घर बैठे फ्री पैसे कमाने के लिए क्लिक करे यहाँ जाये

क्योकि वे ब्राह्मण की सन्तान की रक्षा यमराज से नहीं कर पाए अतः अर्जुन आत्मदाह की तैयारी करने लगे. जब अर्जुन आत्मदाह के लिए तैयार हुए तभी वासुदेव श्री कृष्ण ने उन्हें ऐसा करने से रोका. अर्जुन को रोकते हुए श्री कृष्ण बोले की यह सब तो मेरी माया थी ताकि तुम यह जान सको की व्यक्ति को कभी भी अपने ताकत पर अभिमान नहीं करना चाहिए क्योकि नियति से बड़ी कोई ताकत नहीं है. भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को अपना शिष्य ही नहीं मानते थे बल्कि वे उन्हें अपना सबसे अच्छा मित्र भी समझते थे. जब श्री कृष्ण को यह अहसास हुआ की उनके मित्र अर्जुन को अपने शक्ति एवम सामर्थ्य का अभिमान हो चुका है तो उन्होंने इसके लिए यह सारा खेल रचाया था. ताकि अर्जुन को यह अहसास कराया जा सके की इंसान के हाथो में सब कुछ नहीं है. ऐसा कर भगवान श्री कृष्ण अर्जुन के प्रति अपने मित्रता का फर्ज निभाया तथा उनके अहंकार को चूर किया.

निचे कमेंट करके अपने राय जरुर बताये की आपको ये पोस्ट कैसी लगी

इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगो तक शेयर करे, और इस तरह के पोस्ट को पढने के लिए आप हमारी वेबसाइट विजिट करते रहे.

देखें, जब भीम ने युधिष्ठिर को धर्म ज्ञान दिया..

देखें, जब भीम ने युधिष्ठिर को धर्म ज्ञान दिया..

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

महाभारत में भीम को मुख्यतः बल का प्रतीक माना जाता है। उनकी बुद्धि के विषय में ज्यादा चर्चा नहीं की जाती। जबकि सत्य ये है कि वो जितने बलशाली थे उतने ही बुद्धिमान भी थे। उससे भी अधिक कहा जाये तो वे अत्यंत स्पष्टवादी थे। कदाचित ही महाभारत में कोई ऐसा पात्र है जो उतना स्पष्टवादी हो। वैसे तो उनकी स्पष्टवादिता के कई उदाहरण है लेकिन एक कथा ऐसी भी है जिसके द्वारा उन्होंने युधिष्ठिर को उनके कर्तव्य की याद दिलाई। इससे ये भी सिद्ध होता है कि वे सही चीज के लिए अपने भाइयों को भी नहीं छोड़ते थे।

महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था और युधिष्ठिर सार्भौम सम्राट घोषित किये जा चुके थे और उनके शासन में हस्तिनापुर की जनता बहुत शांति से जीवन बिता रहे थे।
उन्होंने ये घोषणा करवा रखी थी कि अगर कोई व्यक्ति को कोई कष्ट है तो वो उनसे मिलने आ सकते हैं। भीम युवराज तो थे ही साथ ही साथ वे गृह मंत्रालय भी सँभालते थे। इसका कारण ये था कि वे जनता से सीधे संवाद करने में माहिर थे। एक बार एक व्यक्ति सम्राट युधिष्ठिर से मिलने को आया। उसे कुछ समस्या थी जिसका निदान वो अपने राजा से चाहता था। उस समय शाम हो चुकी थी और राजसभा का कार्य समाप्त हो गया था। लेकिन फिर भी युधिष्ठिर ने उस व्यक्ति को अपने पास बुलाया।

जब वो व्यक्ति वहाँ आया तो उन्होंने उससे पूछा कि उसे क्या समस्या है। उस व्यक्ति ने उन्हें अपने समस्या बताई और उनसे समाधान की प्रार्थना की। तब युधिष्ठिर ने समय को देखते हुए उससे कल आने को कहा। राजा की आज्ञा को पाकर वो व्यक्ति वापस जाने लगा कि तभी भीम हँसने लगे। भीम को इस प्रकार हँसते देख कर सभी आश्चर्यचकित रह गए। युधिष्ठिर ये अच्छी तरह जानते थे कि भीम कभी भी उनका अपमान नहीं कर सकते इसी कारण उनकी हँसी के पीछे अवश्य कोई कारण होगा। ये सोच कर उन्होंने उस व्यक्ति को जाने से रोका और भीम से पूछा - “हे अनुज! तुम्हे धर्म और राजनीति के मर्म का ज्ञान है। इसीलिए तुम्हारा इस प्रकार असमय हँसना मुझे आश्चर्य में डाल रहा है। अवश्य ही इसके पीछे कोई कारण है। इसीलिए ये बताओ कि तुम इस प्रकार क्यों हँसे?”

तब भीम ने हाथ जोड़ कर कहा - ” हे महाराज! मैं आज तक आपको एक मनुष्य ही समझता था किन्तु आप तो ईश्वर निकले। मैं इसीलिए हँस रहा था कि मैं इतने वर्ष आपके साथ रहा पर अब तक आपको पहचान नहीं पाया।”

भीम का ये जवाब सुनकर युधिष्ठिर और आश्चर्य में पड़ गए। उन्होंने उनसे पूछा कि वे ऐसा क्यों समझते हैं कि वे ईश्वर हैं।



घर बैठे फ्री पैसे कमाने के लिए क्लिक करे यहाँ जाये

तब भीम ने सभी के सामने निर्भीक होकर एक कटु सत्य कहा - “हे महाराज! आज आपने इस याचक को ये कह कर लौटा दिया कि कल आना। किसी को ये ज्ञान नहीं हो सकता कि आने वाले समय में क्या हो सकता है। आपको ये पता है कि आप और हम कल तक जीवित रहेंगे। भविष्य का ऐसा ज्ञान तो केवल ईश्वर के लिए ही संभव है। कोई साधारण मनुष्य के पास ऐसा विश्वास नहीं हो सकता।”

भीम का ऐसा उत्तर सुनकर सभी अवाक् रह गए। युधिष्ठिर को भी अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने उसी समय उस याचक की समस्या का निदान किया। इस प्रकार भीम ने अपने एक छोटे से व्यंग से युधिष्ठिर को धर्म का ज्ञान दे दिया।

निचे कमेंट करके अपने राय जरुर बताये की आपको ये पोस्ट कैसी लगी

इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगो तक शेयर करे, और इस तरह के पोस्ट को पढने के लिए आप हमारी वेबसाइट विजिट करते रहे.

देखें, काला धागा बना सकता है आपको बहुत धनवान, शनिवार को कर डालें यह उपाय..

देखें, काला धागा बना सकता है आपको बहुत धनवान, शनिवार को कर डालें यह उपाय..

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

काला धागा बांधने की प्रथा आज की नहीं है, कई सालों से इसे हाथ, पैर, गले और बाजु में बांधा जाता रहा है। मूल रूप से इसे नजर से बचने के लिए बांधा जाता है.. आइए जानें इसके विषय में विस्तार से.

वास्तव में काला धागा बांधने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। हमारा शरीर पंच तत्वों से मिलकर बना है। ये पंच तत्व हैं- पृथ्वी, वायु, अग्नि, जल और आकाश। इनसे मिलने वाली ऊर्जा हमारे शरीर का संचालन करती हैं। इनसे मिलने वाली ऊर्जा से ही हम सभी सुविधाओं को प्राप्त करते हैं। जब किसी इंसान की बुरी नजर हमें लगती है तब इन पंच तत्वों से मिलने वाली संबंधित सकारात्मक ऊर्जा हम तक नहीं पहुंच पाती है।
इसीलिए गले में काला धागा बांधा जाता है। दरअसल कुछ लोग काले धागे में भगवान के लॉकेट भी धारण करते हैं इसे बेहद शुभ माना जाता है।

बुरी नजर से बचने के लिए काले रंग की चीजों का इस्तमाल किया जाता है जैसे काला टीका, काला धागा। काला धागा पहनने या काला टीका लगाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। काला रंग, नजर लगाने वाले की एकाग्रता को भंग कर देता है। इसके कारण नकारात्मक ऊर्जा संबंधित व्यक्ति को प्रभावित नहीं कर पाती।

काला धागा नजर से तो बचाता ही है साथ ही इससे जुड़ा एक उपाय आपको मालामाल बना सकता है। आप बाजार से रेशमी या सूती काला धागा ले आएं और किसी भी मंगलवार या शनिवार की शाम को यह काला धागा हनुमानजी के मंदिर ले जाएं। इस धागे में नौ छोटी-छोटी गांठ लगा लें और हनुमानजी के पैरों का सिंदूर लगा लें।



घर बैठे फ्री पैसे कमाने के लिए क्लिक करे यहाँ जाये

अब इस धागे को घर के मुख्य दरवाजे पर बांध दें या तिजोरी पर बांध दें। सिर्फ एक छोटे से उपाय से आप जल्दी ही मालामाल बन सकते हैं। ऐसा करने से आपके घर में धन-धान्य की अपार वृद्धि होगी। शनिवार को जब किसी को बुरी नजर से बचाने के लिए काला धागा धारण करे तो वहां ॐ शनये नम: का जाप करते हुए नौ गांठ बांध दें।

वैज्ञानिक तौर पर देखा गया है कि काला रंग उष्मा का अवशोषक होता है। इसलिए काला धागा बुरी नजर व हवाओं को अवशोषित कर देता है। जिसका असर हमारे शरीर को नहीं होता है। यह एक तरह का सुरक्षा कवच बना देता है। शनि दोष से बचने के लिए भी इंसान को काले धागे को पहनना चाहिए। इससे शनि का प्रकोप इंसान पर नहीं पड़ता है।

निचे कमेंट करके अपने राय जरुर बताये की आपको ये पोस्ट कैसी लगी

इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगो तक शेयर करे, और इस तरह के पोस्ट को पढने के लिए आप हमारी वेबसाइट विजिट करते रहे.

देखें, शनिवार को क्यों नहीं खरीदते हैं यह 10 तरह की चीजें…

देखें, शनिवार को क्यों नहीं खरीदते हैं यह 10 तरह की चीजें…

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

यूं तो किसी भी वस्तु के उपयोग या क्रय करने का समय उसकी आवश्यकता पर ही निर्भर करता है, परंतु ज्योतिष शास्त्र में भी इसके कुछ नियम बताए गए हैं। जानिए ऐसी कौनसी वस्तुएं हैं जो शनिवार को घर नहीं लानी चाहिए या इस दिन इन्हें नहीं खरीदना चाहिए।

लोहे का सामान

भारतीय समाज में यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है कि शनिवार को लोहे का बना सामान नहीं खरीदना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि शनिवार को लोहे का सामान क्रय करने से शनि देव कुपित होते हैं।

इस दिन लोहे से बनी चीजों के दान का विशेष महत्व है। लोहे का सामान दान करने से शनि देव की कोप दृष्टि निर्मल होती है और घाटे में चल रहा व्यापार मुनाफा देने लगता है।
इसके अतिखाली शनि देव यंत्रों से होने वाली दुर्घटना से भी बचाते हैं।

तेल

इस दिन तेल खरीदने से भी बचना चाहिए। हालांकि तेल का दान किया जा सकता है। काले श्वान को सरसों के तेल से बना हलुआ खिलाने से शनि की दशा टलती है। ज्योतिष के अनुसार, शनिवार को सरसों या किसी भी पोस्टार्थ का तेल खरीदने से वह रोगकारी होता है।

नमक

नमक हमारे भोजन का सबसे अहम भाग है। अगर नमक खरीदना है तो बेहतर होगा शनिवार के बजाय किसी और दिन ही खरीदें। शनिवार को नमक खरीदने से यह उस घर पर कर्ज लाता है। साथ ही रोगकारी भी होता है।

कैंची

कैंची ऐसी चीज है जो कपड़े, कागज आदि काटने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती है। पुराने समय से ही कपड़े के कारोबारी, टेलर आदि शनिवार को नई कैंची नहीं खरीदते। इस दिन खरीदी गई कैंची रिश्तों में तनाव लाती है। इसलिए अगर आपको कैंची खरीदनी है तो किसी अन्य दिन खरीदें।

काले तिल

सर्दियों में काले तिल शरीर को पुष्ट करते हैं। ये शीत से मुकाबला करने के लिए शरीर की गर्मी को बरकरार रखते हैं। पूजन में भी इनका उपयोग किया जाता है। शनि देव की दशा टालने के लिए काले तिल का दान और पीपल के वृक्ष पर भी काले तिल चढ़ाने का नियम है, लेकिन शनिवार को काले तिल कभी न खरीदें। कहा जाता है कि इस दिन काले तिल खरीदने से कार्यों में बाधा आती है।



घर बैठे फ्री पैसे कमाने के लिए क्लिक करे यहाँ जाये

काले जूते

शरीर के लिए जितने जरूरी वस्त्र हैं, उतने ही जूते भी। खासतौर से काले रंग के जूते पसंद करने वालों की तादाद आज भी काफी है। अगर आपको काले रंग के जूते खरीदने हैं तो शनिवार को न खरीदें। मान्यता है कि शनिवार को खरीदे गए काले जूते पहनने वाले को कार्य में असफलता दिलाते हैं।

ज्वलनशील पोस्टार्थ

रसोई के लिए ईंधन, माचिस, केरोसीन आदि ज्वलनशील पोस्टार्थ आवश्यक माने जाते हैं। भारतीय संस्कृति में अग्नि को देवता माना गया है और ईंधन की पवित्रता पर विशेष जोर दिया गया है लेकिन शनिवार को ईंधन खरीदना वर्जित है। कहा जाता है कि शनिवार को घर लाया गया ईंधन परिवार को कष्ट पहुंचाता है।

झाड़ू

झाड़ू घर के विकारों को बुहार कर उसे निर्मल बनाती है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। झाड़ू खरीदने के लिए शनिवार को उपयुक्त नहीं माना जाता। शनिवार को झाड़ू घर लाने से दरिद्रता का आगमन होता है।

चक्की

इसी प्रकार अनाज पीसने के लिए चक्की भी शनिवार को नहीं खरीदनी चाहिए। माना जाता है कि यह परिवार में तनाव लाती है और इसके आटे से बना भोजन रोगकारी होता है।

स्याही

विद्या मनुष्य को यश और प्रसिद्धि दिलाती है और उसे अभिव्यक्त करने का सबसे बड़ा माध्यम है कलम। कलम की ऊर्जा है स्याही। कागज, कलम और दवात आदि खरीदने के लिए सबसे श्रेष्ठ दिन गुरुवार है। शनिवार को स्याही न खरीदें। यह मनुष्य को अपयश का भागी बनाती है।

निचे कमेंट करके अपने राय जरुर बताये की आपको ये पोस्ट कैसी लगी

इस पोस्ट को अधिक से अधिक लोगो तक शेयर करे, और इस तरह के पोस्ट को पढने के लिए आप हमारी वेबसाइट विजिट करते रहे.