Thursday, 7 February 2019

देखें ,जीवन के लिए बेहद चमत्कारी है ‘तुलसी’, बस ऐसे करें सेवन!..

देखें ,जीवन के लिए बेहद चमत्कारी है ‘तुलसी’, बस ऐसे करें सेवन!..

आज एक बार फिर मै जीवन से जुड़े कुछ जरुरी तथ्यों के साथ ये नयी पोस्ट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को आखिरी तक पढ़ते रहे ..

आपको बता दें तुलसी उम्रर्वेदिक चिकित्सा पोस्ट्धति में सबसे ज्यादा प्रभावशाली औषधि के रूप में जानी जाती है। कैंसर और ऐसी अनेक लाइलाज बीमारियों में तुलसी चमत्कारिक रूप से फायदा पहुंचाती है। हम आपको बता दें तुलसी के पत्तों के रस को हल्का गर्म कर लें। अब दो-दो बूंद कान में टपकाएं। इससे कान का दर्द दूर होता है।

इससे भी होते है कई फायदे

हम आपको बता दें दांत दर्द में काली मिर्च और तुलसी के पत्तों की गोली बनाकर दातों के नीचे रखने से बहुत आराम मिलता है। वहीं तुलसी के रस को गुनगुने पानी में मिलाकर कुल्ला करने से गले की बीमारियां दूर हो जाती हैं।
वही हम आपको बता दें इसके सेवन से उल्टी में आराम मिलता है। तुलसी के पत्ते का रस दिन में तीन बार पीने से भूख बढ़ती है। साथ ही साथ 2 ग्राम तुलसी की मंजरी को पीसकर काले नमक के साथ दिन में तीन-चार बार लेने से पेट दर्द में बहुत आराम मिलता है।

यह भी होते है इससे फायदे



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इसी के साथ हम आपको बता दें तुलसी के पत्तों के रस को हल्का गर्म कर लें। अब दो-दो बूंद कान में टपकाएं। इससे कान का दर्द दूर होता है। कान के पीछे की सूजन को ठीक करने के लिए तुलसी के पत्ते, अरंड की कोपलें और चुटकी भर नमक को पीसकर उसका गुनगुना लेप लगाएं। इससे कान के पीछे की सूजन खत्म हो जाती है। हम आपको बता दें दांत दर्द में काली मिर्च और तुलसी के पत्तों की गोली बनाकर दातों के नीचे रखने से बहुत आराम मिलता है।

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काले और भद्दे होठों को गुलाबी बनाने का यह है 3 सबसे आसान घरेलू तरीका

काले और भद्दे होठों को गुलाबी बनाने का यह है 3 सबसे आसान घरेलू तरीका

आप सभी लोगो के होठों और पैरों की एड़ियों का फटना व काले धब्बों का पड़ना आम बात है. अक्सर लोग होंठों की समस्या से परेशान रहते है. ऐसे में ज्यादातर लोग अलग अलग उपाय करते है. सुंदर होठों की मुस्कराहट बहुत अच्छी दिखती है. लेकिन कई बार कई कारणों की वजह से होठों में कालापन आने लग जाता है. जिसके कारण होंठ काले हो जाते है और आपकी अच्छी मुस्कुराहट लोगो से छुपानी पड़ती है. आज हम आपको होंठों का कालापन दूर करने के घरेलू उपाय बताएँगे. तो चलिए जानते हैं.

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1. होठों का कालापन दूर करने के उपाय में आलू का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद साबित होता है. कच्चे आलू के कटे हुए हिस्सो को होंठों पर रगड़ने से कालापन दूर होता है. 


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2. होठों की लालिमा यानी खूबसूरती कायम रखने के लिए चीनी के साथ नारियल तेल की कुछ बूंदे मिलाकर पेस्ट तैयार करले और टूथ ब्रश की सहायता से इससे धीरे-धीरे अपने होठों को स्क्रब करें. इससे होठों का कालापन दूर होगा और साथ में प्राकृतिक चमक भी मिलेगी.



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3. चुकंदर स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है. शरीर में तेज़ खून बनाने में मदद करता  है. चुकंदर होंठ के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. चुकंदर को काटकर उसके टुकड़े को होंठों पर लगाने से होठ गुलाबी व चमकदार बनते हैं.

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देखें, ऐसे करें शिव चालीसा का पाठ, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं..

देखें, ऐसे करें शिव चालीसा का पाठ, पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं..

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

पूजा पाठ में शिव चालीसा का बहुत महत्व है. शिव चालीसा के सरल शब्दों से भगवान शिव को प्रसन्न किया जा सकता है. शिव चालीसा के पाठ से कठिन से कठिन कार्य को बहुत ही आसानी से किया जा सकता है. शिव चालीसा की 4 पंक्तियां सरल शब्दों में विद्यमान हैं, जिनकी महिमा बहुत ही ज्यादा है. भोले स्वभाव के होने के कारण भगवान भोले भंडारी शिव चालीसा के पाठ से आसानी से मान जाते हैं और भक्त को मनचाहा वरदान दे देते है. इसलिए शिव चालीसा के पाठ की बहुत महिमा है.

जानते हैं शिव चालीसा का पाठ कैसे किया जाए-

- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहने.

- अपना मुंह पूर्व दिशा में रखें और साफ आसन पर बैठें.

- पूजा में धूप दीप सफेद चंदन माला और सफेद 5 फूल भी रखें और मिश्री को प्रसाद के लिए रखें.

- पाठ करने से पहले गाय के घी का दिया जलायें और एक लोटे में शुद्ध जल भरकर रखें.

- भगवान शिव की शिव चालिसा का तीन बार पाठ करें.

- शिव चालीसा का पाठ बोल बोलकर करें, जितने लोगों को यह सुनाई देगा उनको भी लाभ होगा.

- शिव चालीसा का पाठ पूर्ण भक्ति भाव से करें और भगवान शिव को प्रसन्न करें.

- पाठ पूरा हो जाने पर लोटे का जल सारे घर मे छिड़क दें और थोड़ा सा जल स्वयं पी लें. मिश्री प्रसाद के रूप में खाएं औऱ बच्चों में भी बांट दें.

शिव चालीसा पढ़कर ऐसे पाएं मनचाहा वरदान-

- ब्रह्म मुहूर्त में एक सफेद आसन पर बैठें.

- उत्तर पूर्व या पूर्व दिशा की तरफ मुंह करें.

- गाय के घी का दिया जला कर शिव चालीसा का 11 बार पाठ करें.

- जल का पात्र रखें और मिश्री का भोग लगाएं.

- एक बेलपत्र भी उल्टा करके शिवलिंग पर अर्पण करें.

- मनचाहे वरदान की इच्छा करें और यह पाठ 4 दिन लगातार करें.

शिव चालीसा से होंगे ढेरों फायदे-



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1. मन का भय यदि है तो निम्न पंक्ति पढ़ें. इस पंक्ति को 27 बार सुबह भगवान शिव के सामने पड़ने से लोभ होगा.

जय गणेश गिरीजा सुवन’ मंगल मूल सुजान|

कहते अयोध्या दास तुम’ देउ अभय वरदान||

2. दुखों से मुक्ति पाने के लिए ये पंक्ति पढ़ें.

देवन जबहिं जाय पुकारा’ तबहिं दुख प्रभु आप निवारा||

- इस पंक्ति को 11 बार रात्रि में पढ़ कर सोएं और कार्य सिद्ध हो जाने पर निर्धन लोगों को सफेद मिठाई जरूर बाटें.

3. किसी भी कार्य को सिद्ध करने के लिए निम्न पंक्ति पढ़ें.

पूजन रामचंद्र जब कीन्हा’ जीत के लंक विभीषण दीन्हा||

- इस पंक्ति को 13 बार शाम के समय पढ़ें.

- ऐसा लगातार 27 दिन जरूर करें.

4. मनोवांछित वर प्राप्ति के लिए करें इस पंक्ति का पाठ करें.

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर’ भाई प्रसन्न दिए इच्छित वर||

- इस पंक्ति को मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए सुबह के समय 54 बार पाठ करें. ऐसा आपको 21 दिन करना है.

5. धन धान्य की वृद्धि के लिए इस पंक्ति का पाठ करें.

धन निर्धन को देत सदा ही’ जो कोई जांचे सो फल पाही||

- इस पंक्ति को 11 बार सुबह के समय पढे़ं.

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देखें ,इन चमत्कारी नुस्खों की मदद से अब आप भी डेंगू जैसी बिमारी से छुटकारा पा सकते हैं!..

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आज एक बार फिर मै जीवन से जुड़े कुछ जरुरी तथ्यों के साथ ये नयी पोस्ट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को आखिरी तक पढ़ते रहे ..

जयपुर। जैसा की आप सभी देख रहे हैं कि आज कल डेंगू बीमारि का बहुत ज़ोर चल रहा है, बहुत से लोग तो इस बीमारि का नाम सुनते ही डर जाते हैं, हम लोग मानते हैं, कि बीमारियों डरना आपका वजिब है, पर आप लोगो को बता दें कि आप कुछ चमत्कारी नुस्खों की मदद से अपने आप और अपने घर वालों को डेंगू जैसी बिमारी से छुटकारा दिला सकते हैं, अगर आप भी अपने परिवार को डेंगू जैसी बिमारी से बचाना चाहते हैं, तो हमारा पोस्ट पूरा पड़े।

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देखें, सीता माता की तरह ही हुआ था लक्ष्मी माँ का भी हरण!..

देखें, सीता माता की तरह ही हुआ था लक्ष्मी माँ का भी हरण!..

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

पुरानी कहानियों और कथाओं के अनुसार कई ऐसी बातें बताई गई है जिन्हे सुनने के बाद हैरानी होती है. ऐसे में आप सभी ने शायद ही सुना होगा कि सीता की तरह माता लक्ष्मी का भी हरण हो गया था. जी हाँ, यह बात कई लोगों ने कहीं ना कहीं पौराणिक कथाओं में सुनी होगी और कई लोगों ने नहीं भी. ऐसे में अब आज हम आपको इसकी पौराणिक कथा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे पढ़ने के बाद आ हैरान रह जाएंगे. आइए जानते हैं.

पौराणिक कथा - देवासुर संग्राम में देवताओं के पराजित होने के बाद सभी देवगुरु बृहस्पति के पास पहुंचे. इंद्र ने देवगुरु से कहा कि असुरों के कारण हम आत्महत्या करने पर मजबूर है.
देवगुरु सभी देवताओं को दत्तात्रेय के पास ले गए. उन्होंने सभी देवताओं को समझाया और फिर से युद्ध करने की तैयारी करने को कहा. सभी ने फिर से युद्ध किया और हार गए. वे फिर से विष्णुरूप भगवान दत्तात्रेय के पास भागते हुए पहुंचे. वहां उनके पास माता लक्ष्मी भी बैठी थी. दत्तात्रेय उस वक्त समाधिस्थ थे. तभी पीछे से असुर भी वहां पहुंच गए. असुर माता लक्ष्मी को देखकर उन पर मोहित हो गए. असुरों ने मौका देखकर लक्ष्मी का हरण कर लिया. दत्तात्रेय ने जब आंख खोली तो देवताओं ने दत्तात्रेय को हरण की बात बताई. तब दत्तात्रेय ने कहा, ‘अब उनके विनाश का काल निश्चत हो गया है.’ तब वे सभी कामी बनकर कमजोर हो गए और फिर देवताओं ने उनसे युद्ध कर उन्हें पराजित कर दिया. जब युद्ध जीतकर देवता भगवान दत्तात्रेय के पास पहुंचे तो वहां पहले से ही लक्ष्मी माता बैठी हुई थी. दत्तात्रेय ने कहा कि लक्ष्मी तो वहीं रहती है जहां शांति और प्रेम का वातारण होता है. वह कभी भी कैसे कामियों और हिंसकों के यहां रह सकती है?

एक अन्य कथा अनुसार - दैत्येगुरु शुक्राचार्य के शिष्य असुर श्रीदामा से सभी देवी और देवता त्रस्त हो चले थे. सभी देवता ब्रह्मदेव के साथ विष्णुजी के पास पहुंचे. विष्णुजी ने श्रीदामा के अंत का आश्वासन दिया. श्रीदामा को जब यह पता चला तो वह श्रीविष्णु से युद्ध की योजना बनाने लगा. दोनों का घोर युद्ध हुआ. लेकिन श्रीदामा पर विष्णुजी के दिव्यास्त्रों का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि शुक्राचार्य ने उसका शरीर वज्र के समान कठोर बना दिया था. अंतत: विष्णुजी को मैदान छोड़कर जाना पड़ा. इस बीच श्रीदामा ने विष्णु पत्नी लक्ष्मी का हरण कर लिया. तब श्री विष्णु ने कैलाश पहुंचकर वहां पर भगवान शिव का पूजन किया और शिव नाम जपकर “शिवसहस्त्रनाम स्तोत्र” की रचना कर दी.



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जब के साथ उन्होंने “हरिश्वरलिंग की स्थापना कर 1 ब्रह्मकमल अर्पित करने का संकल्प लिया. 999 ब्रह्मकमल अर्पित करने के बाद उन्होंने देखा की एक ब्रह्मकमल कहीं लुप्त हो गया है, तब उन्होंने अपना दाहिना नेत्र निकालकर ही शिवजी को अर्पित कर दिया. यह देख शिव जी प्रकट हो गए. शिवजी ने इच्‍छीत वर मांगने को कहा. तब श्री विष्णु ने लक्ष्मी के अपहरण की कथा सुनाई. तभी शिव की दाहिनी भुजा से महातेजस्वी सुदर्शन चक्र प्रकट हुआ. इसी सुदर्शन चक्र से भगवान विष्णु ने श्रीदामा का का नाश कर महालक्ष्मी को श्रीदामा से मुक्त कराया तथा देवों को दैत्य श्रीदामा के भय से मुक्ति दिलाई.

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देखें ,फायदेमंद है ‘गन्ने का रस’, बस ऐसे कभी ना करें उपयोग!..

देखें ,फायदेमंद है ‘गन्ने का रस’, बस ऐसे कभी ना करें उपयोग!..

आज एक बार फिर मै जीवन से जुड़े कुछ जरुरी तथ्यों के साथ ये नयी पोस्ट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को आखिरी तक पढ़ते रहे ..

गन्ने का रस सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसके अलावा जॉन्डिस जैसी घातक बीमारी से लेकर गर्भवती महिलाओं के लिए यह बेहतरीन पेय है। एनीमिया, कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से बचने के लिए भी गन्ने का रस काफी कारगर साबित होता है। लेकिन आज हम आपको गन्ने के रस से होने वाले नुकसान के बारे में बताते हैं। आइए जानते हैं गन्ने के रस के नुकसान और इसे कब पीना चाहिए।

यह है इसके फायदे

आपको बता दें गन्ने का जूस पीते वक्त दुकान की साफ सफाई का ध्यान रखें। कहीं दुकान में बहुत ज्यादा मक्खियां हुई तो ऐसी दुकानों से गन्ने का जूस पीने से बचें। इससे संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है।
वही गन्ने के जूस में काफी मात्रा में कैलोरी पाई जाती है, जिससे वजन बढ़ने का डर रहता है। इसलिए जो लोग अपनी फिटनेस को लेकर काफी सजग रहते हैं उन्हें अधिक मात्रा में गन्ने के रस का सेवन नहीं करना चाहिए।



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इसी के साथ हम आपको बता दें रास्तों में खड़ी किसी भी दुकान से गन्ने का जूस न पीयें। ऐसी दुकानों से गन्ने का रस पीने से पेट में दर्द आदि समस्या भी हो सकती है। साथ ही फ्रीज में रखे गन्ने का रस पीते हैं, उनके लिए यह फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है।

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इस फल के सेवन से समाप्त हो जाते हैं ये गंभीर रोग, इसका नाम जरुर जान लें

इस फल के सेवन से समाप्त हो जाते हैं ये गंभीर रोग, इसका नाम जरुर जान लें

आज हम आपको एक ऐसे फल के बारे में बताने जा रहे है जो हमारे सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है. इस फल का नाम स्टार फ्रूट है. इस फल के सेवन से आपको बहुत से बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है. जो लोग शारिरिक रूप से कमजोर होते है उन्हें स्टार फ्रूट का सेवन करना चाहिए. स्टार फ्रूट का सेवन करने से कमजोरी दूर होती है.

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त्वचा सम्बंधित परेशानि जैसे फोडे, फुंसी,दाग धब्बे आदि से परेशान है तो आपको स्टार फ्रूट का सेवन करना चाहिए.  जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है उन्हें स्टार फ्रूट का सेवन करना चाहिए. क्योंकि स्टार फ्रूट में मल्टीविटामिन पाए जाते है जो हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायता प्रदान करते है.

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स्टार फ्रूट का उपयोग करने से बॉडी को एनर्जी मिलती है. इसका इस्तेमाल कालीमिर्च पाउडर, जीरा पाउडर, मिर्ची पाउडर के साथ खाने में किया जा सकता है.



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स्टार फ्रूट का जूस शरीर के लिए लाभकारी होता है. शराब के नशे से निजात दिलाने में ये जूस अहम रोल निभाता है. भूख बढ़ाने के लिए इसका जूस पीना चाहिए. इसका प्रयोग करने से भूख लगने लगती है. स्टार फ्रूट के जूस में आप एक चम्मच चीनी भी डाल सकते हैं. करीब दो-चार दिनों तक इस जूस का उपयोग करें. इससे बहुत फायदा मिलेगा.


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डैंड्रफ की समस्या को दूर करने में ये फल काफी फायदेमंद होता है. बादाम के तेल में  इसका जूस मिला लें और फिर इस मिक्सचर को आप अपने स्कैल्प पर करीब आधे घंटे के लिए लगाएं. इससे बाल शाइनी हो जाएंगे और डैंड्रफ से छुटकारा मिलेगा.

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देखें, भगवान राम और श्री हनुमान की यह कथा आपने कभी नहीं सुनी होगी..

देखें, भगवान राम और श्री हनुमान की यह कथा आपने कभी नहीं सुनी होगी..

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि हनुमानजी ने रामेश्वरम के ज्योतिर्लिंग को एक बार उखाड़ना चाहा था लेकिन उस समय उनका अभिमान टूट गया था. जी हाँ, इस बारे में तमिल भाषा में महर्षि कम्बन की रामायण ‘इरामावतारम्’ लिखी है जिसमे एक कथा का उल्लेख मिलता है. आप सभी को बता दें कि यह कथा हमें वाल्मिकी रामायण और तुलसीदासकृत रामचरित मानस में नहीं मिलती है और वाल्मिकी रामायण के इतर भी रामायण काल की कई घटनाओं का जिक्र हमें इरामावतारम्, अद्भुत रामायण और आनंद रामायण में मिलता है. इसी में ऐसी एक कथा है रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापना की जिसका जिक्र स्कन्दपुराण में भी है वही आज हम आपको बताने जा रहे हैं.
आइए जानते हैं वह पौराणिक कथा.

पौराणिक कथा - इस कथा अनुसार जब भगवान श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त कर लौट रहे थे तो उन्होंने गंधमादन पर्वत पर विश्राम किया वहां पर ऋषि मुनियों ने श्री राम को बताया कि उन पर ब्रह्महत्या का दोष है जो शिवलिंग की पूजा करने से ही दूर हो सकता है। इसके लिए भगवान श्रीराम ने हनुमान से शिवलिंग लेकर आने को कहा। हनुमान तुरंत कैलाश पर पहुंचें लेकिन वहां उन्हें भगवान शिव नजर नहीं आए अब हनुमान भगवान शिव के लिए तप करने लगे उधर मुहूर्त का समय बीता जा रहा था। अंतत: भगवान शिवशंकर ने हनुमान की पुकार को सुना और हनुमान ने भगवान शिव से आशीर्वाद सहित एक अद्भुत शिवलिंग प्राप्त किया लेकिन तब तक देर हो चुकी मुहूर्त निकल जाने के भय से माता सीता ने बालु से ही विधिवत रूप से शिवलिंग का निर्माण कर श्री राम को सौंप दिया जिसे उन्होंने मुहूर्त के समय स्थापित किया।

जब हनुमान वहां पहुंचे तो देखा कि शिवलिंग तो पहले ही स्थापित हो चुका है इससे उन्हें बहुत बुरा लगा। तब उन्होंने श्रीराम से कहा कि ‘हे प्रभु! आपके आदेश पर मैं इतना श्रम कर ये शिवलिंग लाया हूं और आपने किसी और शिवलिंग की स्थापना कर ली। ये शिवलिंग भी तो केवल बालू का बना है इसी कारण ये अधिक समय तक नहीं टिक पाएगा जबकि मैं पाषाण से बना शिवलिंग लेकर आया हूं।’ श्रीराम हनुमान की भावनाओं को समझ रहे थे उन्होंने हनुमान को समझाया भी लेकिन वे संतुष्ट नहीं हुए तब श्रीराम ने कहा, ‘हे हनुमान! इसमें दुखी होने की कोई बात नहीं है किन्तु यदि तुम्हारी इच्छा हो तो इस शिवलिंग को हटा कर तुम अपने शिवलिंग की स्थापना कर दो। यदि तुम ऐसा कर सके तो हम तुम्हारे ही शिवलिंग की पूजा करेंगे।’ यह सुनकर हनुमानजी ने सोचा कि उनके एक प्रहार से तो पर्वत भी टूट कर गिर जाते हैं फिर ये रेत से बना शिवलिंग तो यूंही हट जाएगा।



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इसी अहंकार की भावना से हनुमान उस शिवलिंग को हटाने का प्रयास करने लगे किन्तु आश्चर्य कि लाख प्रयासों के बाद भी हनुमान ऐसा न कर सके और अंतत: मूर्छित होकर गंधमादन पर्वत पर जा गिरे होश में आने पर उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ तो श्रीराम ने हनुमान द्वारा लाए शिवलिंग को भी नजदीक ही स्थापित किया और उसका नाम हनुमदीश्वर रखा। शिवलिंग स्थापित करने के बाद श्रीराम ने कहा, ‘मेरे द्वारा स्थापित किए गए ज्योतिर्लिंग की पूजा करने से पहले तुम्हारे द्वारा स्थापित किए गए शिवलिंग की पूजा करना आवश्यक होगा। जो ऐसा नहीं करेगा उसे महादेव के दर्शन का फल प्राप्त नहीं होगा।’ उसी समय से काले पाषाण से निर्मित हनुमदीश्वर महादेव का सबसे पहले दर्शन किया जाता है और उसके बाद रामेश्वरम का दर्शन करते हैं।उसी समय से काले पाषाण से निर्मित हनुमदीश्वर महादेव का सबसे पहले दर्शन किया जाता है और उसके बाद रामेश्वरम का दर्शन करते हैं।

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देखें ,ज्यादा बादाम खाने से भी आपकी सेहत को हो सकते है यह नुकसान!..

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बादाम में कार्बोहाईड्रेट, प्रोटीन, फैट, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं लेकिन बहुत ज्यादा मात्रा में बादाम खाना आपके सेहत के लिए नुकसानदेह भी हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक बादाम की ज्यादा मात्रा का सेवन शरीर को कई सेहत संबंधी समस्याएं दे सकता है।

यह होते है नुकसान

आपको बता दें बादाम का सबसे बड़ा साइड इफेक्ट है कि ये हमारे वजन को बढ़ा देता है। बादाम में कैलोरी और फैट की मात्रा काफी ज्यादा होती है। ऐसे में अगर आप उतनी कैलोरी बर्न करने वाले एक्सरसाइज नहीं करतें हैं तो आपका वजन बढ़ सकता है।
वही जानकारी के लिए बता दें ज्यादा मात्रा में बादाम खाने से शरीर में विटामिन ई का इनटेक ज्याद हो जाता है।

इस समस्या की होती है बढ़ोतरी



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इसी के साथ बादाम फाइबर से भरपूर होते हैं। जरुरत से ज्यादा बादाम का सेवन करने पर कब्ज और सूजन की समस्या हो सकती है। अगर आपका शरीर अधिक फाईबर इस्तेमाल करने का आदी नहीं हैं तो आपका पेट भी खराब हो सकता है। बादाम को पचाना मुश्किल होता है ऐसे में यह पेट पर ज्यादा जोर डालता है।

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Sunday, 3 February 2019

देखें, हर जन्म में धन-धान्य और संपदा का भरपूर सुख देती है षटतिला एकादशी की यह प्रामाणिक कथा..

देखें, हर जन्म में धन-धान्य और संपदा का भरपूर सुख देती है षटतिला एकादशी की यह प्रामाणिक कथा..

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* षटतिला एकादशी की यह पौराणिक कथा करती हैं सर्वकामनाओं की पूर्ति

एक समय नारद जी ने भगवान श्रीविष्णु से प्रश्न किया कि प्रभु षट्तिला एकादशी की क्या कथा है और इस एकादशी को करने से कैसा पुण्य मिलता है, इस संबंध में भगवान विष्णु ने नारद जी से कहा कि- हे नारद! मैं तुमसे सत्य घटना कहता हूं। ध्यानपूर्वक सुनो।

कथा- प्राचीन काल में मृत्युलोक में एक ब्राह्मणी रहती थी। वह सदैव व्रत किया करती थी। एक समय वह एक मास तक व्रत करती रही। इससे उसका शरीर अत्यंत दुर्बल हो गया। यद्यपि वह अत्यंत बुद्धिमान थी तथापि उसने कभी देवताओं या ब्राह्मणों के निमित्त अन्न या धन का दान नहीं किया था।
इससे मैंने सोचा कि ब्राह्मणी ने व्रत आदि से अपना शरीर शुद्ध कर लिया है, अब इसे विष्णुलोक तो मिल ही जाएगा परंतु इसने कभी अन्न का दान नहीं किया, इससे इसकी तृप्ति होना कठिन है।

भगवान ने आगे कहा- ऐसा सोचकर मैं भिखारी के वेश में मृत्युलोक में उस ब्राह्मणी के पास गया और उससे भिक्षा मांगी। वह ब्राह्मणी बोली- महाराज किसलिए आए हो? मैंने कहा- मुझे भिक्षा चाहिए। इस पर उसने एक मिट्टी का ढेला मेरे भिक्षापात्र में डाल दिया। मैं उसे लेकर स्वर्ग में लौट आया।

कुछ समय बाद ब्राह्मणी भी शरीर त्याग कर स्वर्ग में आ गई। उस ब्राह्मणी को मिट्टी का दान करने से स्वर्ग में सुंदर महल मिला, परंतु उसने अपने घर को अन्नादि सब सामग्रियों से शून्य पाया। घबरा कर वह मेरे पास आई और कहने लगी कि भगवन् मैंने अनेक व्रत आदि से आपकी पूजा की, परंतु फिर भी मेरा घर अन्नादि सब वस्तुओं से शून्य है। इसका क्या कारण है?



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इस पर मैंने कहा- पहले तुम अपने घर जाओ। देवस्त्रियां आएंगी तुम्हें देखने के लिए। पहले उनसे षटतिला एकादशी का पुण्य और विधि सुन लो, तब द्वार खोलना। मेरे ऐसे वचन सुनकर वह अपने घर गई। जब देवस्त्रियां आईं और द्वार खोलने को कहा तो ब्राह्मणी बोली- आप मुझे देखने आई हैं तो षटतिला एकादशी का माहात्म्य मुझसे कहो।

उनमें से एक देवस्त्री कहने लगी कि मैं कहती हूं। जब ब्राह्मणी ने षटतिला एकादशी का माहात्म्य सुना तब द्वार खोल दिया। देवांगनाओं ने उसको देखा कि न तो वह गांधर्वी है और न आसुरी है वरन पहले जैसी मानुषी है। उस ब्राह्मणी ने उनके कथनानुसार षटतिला एकादशी का व्रत किया। इसके प्रभाव से वह सुंदर और रूपवती हो गई तथा उसका घर अन्नादि समस्त सामग्रियों से युक्त हो गया। अत: मनुष्यों को मूर्खता त्याग कर षटतिला एकादशी का व्रत और लोभ न करके तिलादि का दान करना चाहिए। इससे दुर्भाग्य, दरिद्रता तथा अनेक प्रकार के कष्ट दूर होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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देखें ,सर्दी में होने वाले फंगल इन्फेक्शन को इस तरह रोकें!..

देखें ,सर्दी में होने वाले फंगल इन्फेक्शन को इस तरह रोकें!..

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सर्दी के मौसम में का तरह की बीमारी होती है. ये गीलेपन से भी होने लगती है और सर्द हवाओं से भी होने लगती है. इस मौसम में मुहांसे, बालों की समस्याएं तथा त्वचा की बीमारियां सबसे ज्यादा देखने में आती हैं. इस मौसम की सबसे ज्यादा खतरनाक चीज है फंगल इंफेक्शन. यदि यह किसी को हो जाता है तब इसको सही होने में काफी समय लगता है. यह हाथ या पैर कहीं भी हो सकती है, लेकिन इससे बचने के तरीके भी हम आपको बताने जा रहे हैं जिससे आप बच सकते हैं. तो आइये जानते हैं इससे बचने के तरीके.

* फंगल इंफेक्शन से यदि आप बचना चाहते हैं तो इसके लिए सावधानी को पहले से ही बरतें. सबसे पहली बात यह है की आप जो भी कपड़े पहनते हैं.
वे कसे हुए नहीं होने चाहिए.

* जिस पानी से आप जगह करते हैं उसमें कुछ बूंद एंटीसेप्टिक को अवश्य मिला लें. इसके अलावा त्वचा की सुरक्षा के लिए एंटीबैक्टीरिल साबुन का ही यूज करें.

* कई बार लोग इस संक्रमण से बचाव के लिए किसी भी दुकान से दवाई ले लेते हैं. जो की गलत है. ऐसा न करके आप सीधे डॉक्टर के पास जाएं तथा डॉक्टरी सलाह के अनुसार ही दवा लें.



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* यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे में जल्दी फ़ैल जाता है. अतः आप ऐसे लोगों से थोड़ी दूरी बनाकर रहें. जिनको यह संक्रमण है.

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देखें, बाली ने श्रीराम से इस तरह लिया था अपनी मौत का बदला..

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आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

वानर राज बालि किष्किंधा का राजा और सुग्रीव का बड़ा भाई था। बालि का विवाह वानर वैद्यराज सुषेण की पुत्री तारा के साथ संपन्न हुआ था। तारा एक अप्सरा थी। बालि के पिता का नाम वानरश्रेष्ठ ‘ऋक्ष’ था। बालि के धर्मपिता देवराज इन्द्र थे। बालि का एक पु‍त्र था जिसका नाम अंगद था। बालि गदा और मल्ल युद्ध में पारंगत था। उसमें उड़ने की शक्ति भी थी। धरती पर उसे सबसे शक्तिशाली माना जाता था।

रामायण के अनुसार बालि को उसके धर्मपिता इन्द्र से एक स्वर्ण हार प्राप्त हुआ था। इस हार की शक्ति अजीब थी। इस हार को ब्रह्मा ने मंत्रयुक्त करके यह वरदान दिया था कि इसको पहनकर बालि जब भी रणभूमि में अपने दुश्मन का सामना करेगा तो उसके दुश्मन की आधी शक्ति क्षीण हो जाएगी और यह आधी शक्ति बालि को प्राप्त हो जाएगी।
इस कारण से बालि लगभग अजेय था।

बालि ने अपनी शक्ति के बल पर दुदुंभी, मायावी और रावण को परास्त कर दिया था। बालि ने अपने भाई सुग्रीव की पत्नी को हड़पकर उसको बलपुर्वक अपने राज्य से बाहर निकाल दिया था। हनुमानजी ने सुग्रीव को प्रभु श्रीराम से मिलाया। सुग्रीव ने अपनी पीड़ा बताई और फिर श्रीराम ने बालि को छुपकर तब तीर से बार दिया जबकि बालि और सुग्रीव में मल्ल युद्ध चल रहा था।

चूंकि प्रभु श्रीराम ने कोई अपराध नहीं किया था लेकिन फिर भी बालि के मन में यह दंश था कि उन्होंने मुझे छुपकर मारा। जब प्रभु श्रीराम ने कृष्ण अवतार लिया तब इसी बालि ने जरा नामक बहेलिया के रूप में नया जन्म लेकर प्रभाव क्षेत्र में विषयुक्त तीर से श्रीकृष्ण को हिरण समझकर तब मारा जब वे एक पेड़ के नीचे योगनिद्रा में विश्राम कर रहे थे।

दरअसल, श्रीकृष्‍ण ने द्वारिका में अपना निवास जगह बनाया और सोमनाथ के पास स्थित प्रभास क्षेत्र में उन्होंने देह छोड़ दी। भगवान कृष्ण इसी प्रभास क्षेत्र में अपने कुल का नाश देखकर बहुत व्यथित हो गए थे। वे तभी से वहीं रहने लगे थे। एक दिन वे एक वृक्ष के नीचे विश्राम कर रहे थे तभी किसी बहेलिये ने उनको हिरण समझकर तीर मार दिया। यह तीर उनके पैरों में जाकर लगा और तभी उन्होंने देह त्यागने का निर्णय ले लिया।



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पौराणिक मान्यताओं अनुसार प्रभु ने त्रेता में राम के रूप में अवतार लेकर बाली को छुपकर तीर मारा था। कृष्णावतार के समय भगवान ने उसी बाली को जरा नामक बहेलिया बनाया और अपने लिए वैसी ही मृत्यु चुनी, जैसी बाली को दी थी।

प्रभास क्षेत्र काठियावाड़ के समुद्र तट पर स्थित बीराबल बंदरगाह की वर्तमान बस्ती का प्राचीन नाम है। यह एक प्रमुख तीर्थ जगह है। महाभारत के अनुसार यह सरस्वती-समुद्र संगम पर स्थित प्रसिद्ध तीर्थ था- ‘समुद्रं पश्चिमं गत्वा सरस्वत्यब्धि संगमम्’। (1). यह विशिष्ट स्थल या देहोत्सर्ग तीर्थ नगर के पूर्व में हिरण्या, सरस्वती तथा कपिला के संगम पर बताया जाता है। इसे प्राची त्रिवेणी भी कहते हैं। इसे भालका तीर्थ भी कहते हैं।

पांच वर्ष की असहनीय पीड़ा के बाद उस भील जरा को अहसास हो गया कि उसने किसी आम आदमी को नहीं मारा बल्कि मानव की देह धारण करके पृथ्वी पर आए साक्षात भगवान की देह अपने तीर से छीन ली है। वापस उसी जगह पर जाकर ‘गोविंद गोविंद’ कहते हुए उस बहेलिए ने समुद्र में समाकर अपने प्राण त्याग दिए। जिस जगह पर जरा ने श्रीकृष्ण को तीर मारा, उसे आज ‘भालका’ तीर्थ कहा जाता है। वहां बने मंदिर में वृक्ष के नीचे लेटे हुए कृष्ण की आदमकद प्रतिमा है। उसके समीप ही हाथ जोड़े जरा खड़ा हुआ है।

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देखें, इस वर्ष 10 फरवरी को है वसंत पंचमी, रविसिद्धियोग में होगी सरस्वती पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त..

देखें, इस वर्ष 10 फरवरी को है वसंत पंचमी, रविसिद्धियोग में होगी सरस्वती पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त..

आज एक बार फिर मै कुछ धर्मं एवं अध्यात्म से जुडी नयी पोस्ट की अपडेट लेकर आया हूँ, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहे ..

सरस्वती महामाये शुभे कमललोचिनी. विश्वरूपी विशालाक्षी . विद्यां देहि परमेश्वरी. । माघ शुक्ल पंचमी रविवार 1 फरवरी को विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा होगी। इसी दिन मां सरस्वती का अवतार माना जाता है। सरस्वती ब्रह्म की शक्ति के रूप में भी जानी जाती हैं। नदियों की देवी के रूप में भी इनकी पूजा की जाती है।

इस वर्ष सरस्वती पूजा पर ग्रह-गोचरों का महासंयोग बन रहा है। सरस्वती पूजा पर रविवार, रवि सिद्धियोग,अबूझ नक्षत्र और 1 तारीख का महासंयोग बन रहा है। माघ शुक्ल पंचमी शनिवार 9 फरवरी की दोपहर 12.25 बजे से शुरू होगा जो रविवार 1 फरवरी को दोपहर 2.8 बजे तक है। पूजन के समय अबूझ नक्षत्र का भी संयोग बना है।
पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 6.4 बजे से दोपहर 12.12 बजे तक है।
सरस्वती पूजा पर मंत्र दीक्षा, नवजात शिशुओं का विद्या आरंभ भी किया जाता है। इस तारीख पर मां सरस्वती के साथ गणेश, लक्ष्मी और पुस्तक-लेखनी की पूजा अति फलदायी मानी जाती है। इसी दिन से फाग गीत ग्रामीण इलाकों में गाए जाने लगते हैं। लोग अबीर-गुलाल भी लगाना शुरू कर देते हैं।



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PM मोदी ने इशारों में किया कांग्रेस पर वार- ‘वो कौन पंजा था जो खजाना खाली कर गया’

PM मोदी ने इशारों में किया कांग्रेस पर वार- ‘वो कौन पंजा था जो खजाना खाली कर गया’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को जम्‍मू और कश्‍मीर के दौरे पर हैं. सुबह उन्‍होंने लेह पहुंचकर एयरपोर्ट की नई टर्मिनल बिल्डिंग का शिलान्‍यास किया. इसके बाद उन्‍होंने जम्‍मू के विजयपुर पहुंचकर कई परियोजनाओं का शिलान्‍यास और उद्घाटन किया.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जम्मू-कश्मीर दौर के एक दिवसीय दौरे पर हैं। उन्होंने यहां जम्मू में महारैली को संबोधित करते हुए कहा कि मां वैष्णों की छत्रछाया में जम्मू में एक बार फिर आना, मेरे लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने आगे कहा कि मैं जब भी यहां आता हूं तो यहां की उर्जा मुझे और ज्यादा शक्ति से अपना काम करने को प्रेरित करती है। आपका यही स्नेह मुझे इस बात का एहसास दिलाता रहता है कि मुझे लगातार काम करना है, आपकी आशाओं, अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए मेहनत करनी है

पीएम मोदी ने आगे राज्य हो रहे विकास कार्य का जिक्र करते हुए कहा कि जम्मू में बनने वाला एम्स, इंजीनियरिंग कॉलेज, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन का नया कैंपस, इंफ्रास्ट्रक्चर के अन्य प्रोजेक्ट्स, यहां के लोगों के जीवन को सरल और सुगम बनाने में मदद करेंगे। ये जो 75 बेड का अत्याधुनिक एम्स यहां बनने जा रहा है, इससे जम्मू वासियों को उत्तम स्वास्थ्य सेवाएं तो मिलेंगी ही, शहर के दूसरे मेधावी छात्रों के लिए अनेक नए अवसर भी बनेंगे।।

राज्य में स्वास्थ सेवाओं का तेजी से विस्तार का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि एम्स के साथ-साथ अनंतनाग, बारामूला, डोडा, कठुआ और रजौरी में पांच मेडिकल कालेजों को बनाने का काम तेजी से चल रहा है। इन कालेजों में जल्द ही पढ़ाई भी शुरु होगी। इसका मतलब होगा कि राज्य में MBBS की 5 सौ सीटें और बढ़ जाएंगी।

‘सरकार कश्‍मीरी पंडितों के साथ’
पीएम मोदी ने कहा ‘केंद्र की सरकार मेरे कश्मीरी पंडित, कश्मीरी विस्थापित भाइयों और बहनों के अधिकारों, उनके सम्मान और उनके गौरव के लिए समर्पित है, प्रतिबद्ध है. प्रधानमंंत्री ने कहा कि हमारी सरकार नागरिकता कानून में संशोधन का प्रस्ताव लाई है. ये उस संकल्प का भाग है, जिसके द्वारा हम उन सभी लोगों के साथ खड़े रहेंगे, जो कभी भारत का भाग थे और 1947 में बनी परिस्थितियों के चलते हमसे अलग हो गए.

उन्‍होंने कहा कि मां वैष्णो की छत्रछाया में जम्मू में एक बार फिर आना, मेरे लिए सौभाग्य की बात है. जम्मू और कश्मीर में पिछले 7 साल में 5 एमबीबीएस सीटें थीं, जो भाजपा सरकार के प्रयास से अब दोगुनी होने वाली हैं. दूर-दराज के इलाकों को जोड़ने, यहां की सड़क नेटवर्क को सुधारने के लिए भाजपा सरकार ने प्रधानमंत्री विकास पैकेज में 4 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार युवाओं को समान अवसर देने के लिए समर्पित है. हाल में ही सरकारी सेवाओं और शिक्षण संस्थानों में गरीब सामान्य वर्ग के युवाओं को 1 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला लिया गया है. मैं जब भी यहां आता हूं तो यहां की उर्जा मुझे और ज्यादा शक्ति से अपना काम करने को प्रेरित करती है.

‘विपक्ष का चेहरा लटका हुआ था’
पीएम मोदी ने 1 फरवरी को पेश हुए बजट को देश के विकास के लिए बेहतर बजट बताया. उन्होंने कहा कि अब 75 हजार करोड़ रुपये अब सीधे किसानों के खाते में जाएंगे. अब किसानों के खाते में सीधे 6 हजार रुपये जाएंगे. परसों जब हमारे वित्त मंत्री बजट पढ़ रहे थे तो विपक्ष का चेहरा लटका हुआ था, वो अपना होश गवां बैठे थे.

‘आपकी सुरक्षा के लिए हरसंभव कोशिश जारी’
हर शहीद के परिवार को विश्वास दिलाता हूं कि देश की सरकार आपके साथ, हर कदम पर खड़ी रहेगी. मैं सीमा पार से गोलाबारी का सामना कर रहे परिवारों को भी आश्वस्त करता हूं कि उनकी सुरक्षा के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है. एक तरफ तो दुश्मन को करारा जवाब दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सीमा पर 14 हजार बंकर बनाए जा रहे हैं, ताकि आप सभी सुरक्षित रह सकें.



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पढ़ें, पीएम मोदी के भाषण के मुख्य बातें।।।

  • जम्मू-कश्मीर में पिछले 7 साल में 5 सौ ही MBBS की सीटें थीं, जो भाजपा सरकार के प्रयास के बाद अब दोगुनी से भी अधिक होने वाली है
  • एम्स, मेडिकल कॉलेज के अलावा कठुआ का इंजीनियरिंग कॉलेज और जम्मू में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन का नया कैंपस, यहां के युवा साथियों को प्रोफेशनल एजुकेशन के नए अवसर देने वाले हैं:
  • केंद्र सरकार युवाओं को समान अवसर देने के लिए समर्पित है। हाल में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए शिक्षा और सरकारी सेवाओं में सामान्य वर्ग के गरीब युवाओं को 1 प्रतिशत आरक्षण देने का काम किया गया है।
  • इससे जम्मू के भी अनेक मेधावी गरीब युवा साथियों को लाभ होने वाला है। इसके अलावा सरकार देशभर के शैक्षिक संस्थानों में करीब-करीब 25 प्रतिशत सीटों में भी वृद्धि करने जा रही है।
  • जम्मू में यातायात और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत किया जा रहा है। दूर-दराज के इलाकों को जोड़ने, यहां की सड़क नेटवर्क को सुधारने के लिए भाजपा सरकार ने प्रधानमंत्री विकास पैकेज में 4 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है
  • जम्मू में कनेक्टिविटी के साथ-साथ इलेक्ट्रिसिटी का इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत किया जा रहा है। किश्तवाड़ में चेनाब पर जो हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट बनेगा उससे जम्मू कश्मीर की बिजली की जरुरतें तो पूरी होंगी ही, यहां के हजारों युवाओं को रोजगार भी मिलेगा
  • सरकार ने रातले हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट को चलाने के लिए भी व्यवस्था कर ली है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही राज्य को साढ़े 8 सौ मेगावाट अतिखाली बिजली मिलेगी
  • ऐसा ही एक प्रोजेक्ट पिछले चालीस साल से लटका हुआ था। शाहपुर कंदी बांध परियोजना पर भी अब जम्मू-कश्मीर ने पंजाब के साथ समझौता कर लिया है। इससे राज्य को बिजली तो मिलेगी साथ ही, सांबा और कठुआ जिलों की 32 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के दायरे में भी लाया जा सकेगा..
  • पहले की सरकारों का देश की आवश्यकताओं और भावनाओं को नजरअंदाज करने का रवैया बहुत पुराना है। अब करतारपुर कारिडोर की बात ही ले लीजिए। अगर ध्यान गया होता तो आज हमारे गुरु नानक की भूमि हमारे देश में होती
  • इसी तरह पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में ऐसे अनेक मां भारती की संतानें हैं जिनके साथ अत्याचार हुआ है। हमारे इन भाइयों बहनों की पीड़ा पर भी किसी ने ध्यान नहीं दिया। हम एक संकल्प के साथ नागरिकता कानून में संशोधन का प्रस्ताव लाए हैं
  • नागरिकता कानून में संशोधन का प्रस्ताव लाए हैं। ये देश के उस संकल्प का भाग है जिसके मुताबिक हम उन सभी लोगों के साथ खड़े रहेंगे, जो कभी भारत का भाग थे लेकिन 1947 में बनी परिस्थितियों के चलते हमसे अलग हो गए
  • अब अगर उनका आस्था के आधार पर शोषण होता है तो उनके साथ देश को खड़ा होना ज़रूरी है। इन सभी लोगों के हकों की रक्षा के लिए भारत हमेशा खड़ा रहेगा, न्याय और जीवन के उनके अधिकारों की रक्षा की जाएगी.
  • आज इस अवसर पर मैं एक और बहुत ही महत्वपूर्ण विषय, बहुत ही भावनात्मक विषय पर बात करना चाहता हूं। ये विषय है मेरे कश्मीरी पंडित, कश्मीरी विस्थापित भाइयों औऱ बहनों का। केंद्र की सरकार उनके अधिकार, उनके सम्मान, उनके गौरव के लिए समर्पित है, प्रतिबद्ध है
  • हिंसा और आतंकवाद के जिस दौर में उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा, जो यातनाएं सहनी पड़ीं, वो हिंदुस्तान कभी नहीं भूल सकता। मैं हर अवसर पर कहता नहीं हूं, लेकिन वो पीड़ा मेरे मन में हमेशा रही है
  • जब हम सरकार में गठबंधन में थे, तो बहुत सी चीजें हो नहीं पाईं थीं। हम लोग बहुत प्राथमिकता दे रहे थे राज्य में पंचायत चुनाव को। लेकिन तब वो संभव नहीं हो पाया:

Web Title : Jammu: PM Modi made gestures on Congress

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