Sunday, 16 December 2018

भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ की कमान, विधायक दल की बैठक में नाम का हुआ ऐलान

भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ की कमान, विधायक दल की बैठक में नाम का हुआ ऐलान

नई दिल्ली: पांच दिन की खींचतान और मंथन के बाद आखिरकार कांग्रेस पार्टी ने छत्तीसगढ़ के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर भूपेश सिंह बघेल के नाम पर मुहर लगा दी है. राज्य की कमान अभी तक रेस में सबसे आगे चल रहे भूपेश बघेल के हाथों में सौंपी गई है। मध्य प्रदेश और राजजगह के बाद छत्तीसगढ़ में भी एक नाम तय करने में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को खूब मशक्कत करनी पड़ी। उन दोनों राज्यों से छत्तीसगढ़ का फैसला काफी मुश्किल रहा क्योंकि यहां दो नहीं, चार-चार दावेदार थे। आखिर में बाजी भूपेश ने मारी। हालांकि, इसकी आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। bhupesh baghel is the new cm of chhattisgarh, official announced ment soon

भूपेश बघेल कांग्रेस प्रदेश कमिटी के प्रमुख हैं। किसान परिवार से ताल्‍लुक रखने वाले भूपेश बघेल राजनीतिक गलियारे में अपने आक्रामक तेवर के लिए जाने जाते हैं। 9 सीटों वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस ने 68 सीटों पर जीत हासिल की है। इस जीत का सेहरा बघेल के सिर ही बांधा जा रहा है क्‍योंकि विधानसभा चुनाव से लेकर नगरीय निकाय चुनाव और पंचायत चुनाव की सारी रणनीति उन्‍होंने ही बनाई।

जमीनी स्तर पर किया काम
भूपेश बघेल ने शुक्रवार सुबह कहा था कि विधायकों की सहमति से फैसला लिया गया है कि मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला पार्टी आलाकमान ले। 9 विधानसभा वाले छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को 68 सीटें मिली हैं। भूपेश बघेल के नेतृत्व में ही कांग्रेस ने यह चुनाव लड़ा। पार्टी के एक सूत्र ने कहा, ‘बघेल ने जमीनी स्तर पर काम करने के साथ-साथ केंद्र और राज्य के नेताओं के साथ समन्वय किया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने बहुत मेहनत की है।’

यूथ कांग्रेस से CM पोस्ट तक
मध्‍य प्रदेश (अब छत्तीसगढ़) के दुर्ग में 23 अगस्त, 1961 को जन्‍मे भूपेश बघेल ने 8 के दशक में कांग्रेस के साथ ही राजनीतिक पारी शुरू की थी। दुर्ग जिले में ही वह यूथ कांग्रेस अध्यक्ष बने। वह 199 से 94 तक जिला युवक कांग्रेस कमिटी, दुर्ग (ग्रामीण) के अध्यक्ष रहे। मध्य प्रदेश हाउसिंग संस्थान के 1993 से 21 तक निदेशक भी रहे। 2 में जब छत्तीसगढ़ अलग राज्य बना तो वह पाटन सीट से विधानसभा पहुंचे। इस दौरान वह कैबिनेट मंत्री भी बने। 23 में कांग्रेस के सत्ता से बाहर होने पर भूपेश को विपक्ष का उपनेता बनाया गया। 214 में उन्हें छत्तीसगढ़ कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया और तब से वह इस पोस्ट पर हैं।

कांग्रेस के लिए किया संघर्ष
भूपेश बघेल ने लंबे समय तक पार्टी के लिए सड़कों पर संघर्ष किया है। उन्होंने रमन सिंह सरकार के साथ-साथ पार्टी से अलग हुए अजीत जोगी से मिली चुनौती का भी सामना किया। कुर्मी क्षत्रिय परिवार से ताल्‍लुक रखने वाले बघेल राज्‍य में पार्टी की जीत पर कह चुके हैं कि राहुल गांधी ने उन्‍हें छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को बहुमत दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी थी और उन्‍होंने यह कर दिखाया।

जानें कौन हैं भूपेश बघेल

छत्तीसगढ़ के दूसरे मुख्यमंत्री के तौर पर भूपेश बघेल के नाम का ऐलान कर दिया है। भूपेश बघेल का जन्म 23 अगस्त 1961 को दुर्ग छत्तीसगढ़ में हुआ। कांग्रेस प्रदेश कमेटी के प्रमुख बघेल कुर्मी क्षत्रिय परिवार से हैं। वहीं वर्तमान में वो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी है। बघेल 1985 से कांग्रेस से जुड़कर राजनीति कर रहे हैं। भूपेश बघेल पहली बार 1993 में विधायक बने थे। उसके बाद मध्य प्रदेश की दिग्विजय सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं।

ऐसे हुई राजनीति में शुरुआत

भूपेश बघेल ने साल 1985 से राजनीति में अपने कॅरियर की शुरुआत की थी।

भूपेश ने 199 से लेकर 1994 तक युवक कांग्रेस कमेटी से जिला अध्यक्ष रहे।

उसके बाद 1996 में उनको छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी समाज का संरक्षक बनाया गया। फिर 1993 से 21 तक मध्यप्रदेश हाउसिंग संस्थान के निदेशक बनाया गया।

2 में जब छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाया गया। तभी उनको सरकार बनते ही कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल गया। पहली बार वो पाटन सीट से विधानसभा पहुंचे।

23 में छत्तीसगढ़ से कांग्रेस बाहर हुई और भाजपा का शासन चला। उसके बाद भूपेश को विपक्ष का उप-नेता बनाया गया। उसके बाद 214 में पार्टी में उनका कद बढ़ा और छत्तीसगढ़ कांग्रेस का अध्यक्ष बनाकर प्रदेश की कमान उनको सौंप दी।

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रेल मंत्री पीयूष गोयल ने वड़ोदरा में पहला रेल विशविद्यालय राष्ट्र को समर्पित किया

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने वड़ोदरा में पहला रेल विशविद्यालय राष्ट्र को समर्पित किया

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने वडोदरा में देश का पहला राष्ट्रीय रेल विश्वविद्यालय कल राष्ट्र को समर्पित किया। श्री पीयूष गोयल ने कहा कि रेल क्षेत्र में व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।

नेशनल रेल और ट्रांसपोर्ट इंस्टीटयूट देश की प्रथम, रशिया और चाइना के बाद विश्व की तीसरी ऐसी रेलवे यूनिवर्सिटी बन गई हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट साकार हो चुका है। रेलवे मंत्रालय ने कैंपस और व्यस्त कार्यक्रम के विकास के लिए अगले पांच सालों में चार सौ 21 करोड़ रुपये के निवेश का प्रावधान किया है। नए ग्रीन कैंपस के लिए राज्य सरकार की तरफ से 1 एकड़ जमीन भी मिल चुकी है। भारतीय रेलवे के तकनीकी और नए संशोधन के साथ आधुनिकता में ले जाने के लिए यह नई रेलवे यूनिवर्सिटी मील का पत्थर साबित होगी।

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भूपेश बघेल होंगे छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री,कल लेंगे शपथ

भूपेश बघेल होंगे छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री,कल लेंगे शपथ

रायपुर 16 दिसम्बर।श्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ कांग्रेस विधायक दल के आज नेता चुन लिए गए।श्री बघेल कल राज्य के नए मुख्यमंत्री के पोस्ट की शपथ लेंगे,जबकि मंत्रिमंडल का गठन बाद में होगा।

पार्टी के केन्द्रीय पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे ने पत्रकारों को यह जानकारी देते हुए बताया कि उनकी तथा एवं राज्य के प्रभारी पी.एस.पुनिया की मौजूदगी में नवनिर्वाचित विधायकों की प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हुई बैठक में श्री बघेल को विधायक दल का नेता चुन लिया गया।बैठक में आलाकमान द्वारा भेजा गय़ा लिफाफा खोला गया जिसमें श्री बघेल का नाम था।श्री बघेल को इसके बाद विधायक दल ने औपचारिक रूप से नेता चुन लिया।

उन्होने बताया कि मुख्यमंत्री पोस्ट के चारों दावेदारों ने मिलकर बराबर काम किया,इसलिए किसी एक को नेता चुनने में काफी दिक्कत हुई।तीन बार पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को बैठक करनी पड़ी। आखिरकार श्री गांधी ने श्री बघेल के नाम पर सहमति दी।उन्होने बताया कि श्री गांधी की मंशा की बैठक में विधायकों को जानकारी दी गई,जिसका सभी से सर्वसम्मति से अनुमोदन किया।उन्होने बताया कि मुख्यमंत्री पोस्ट के शेष तीनों दावेदार डा.चरणदास महंत, ताम्रध्वज साहू एवं टी.एस.सिंहदेव ने भी सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करने वालों में शामिल थे।

श्री खड़गे ने बताया कि कल शाम पांच बजे श्री बघेल मुख्यमंत्री पोस्ट की शपथ लेंगे।मंत्रिमंडल के बारे में पूछे जाने पर उन्होने कहा कि श्री बघेल अकेले शपथ लेंगे,बाद में मिल बैठकर मंत्रिमंडल को आखिरी दिया जायेगा,जिसके बाद उनका अलग से शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा।

श्री बघेल इसके तुरंत बाद वरिष्ठ विधायक रविन्द्र चौबे,मोहम्मद अकबर सहित कई विधायको के साथ राजभवन पहुंचे और विधायक दल की बैठक में नेता चुने जाने का पत्र सौंपते हुए सरकार बनाने का औपचारिक रूप से दावा पेश किया।राज्यपाल आनंदीबेन पटेल इस समय यहां उपलब्ध नही है उनकी अनुपस्थिति में उनके सचिवालय को पत्र सौंपा गया।

शपथ ग्रहण के लिए राज्य़पाल श्रीमती पटेल से पहले ही कल के लिए समय लिया जा चुका है। वह मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री को शपथ ग्रहण करवाने के बाद रायपुर पहुंचेंगी।राजधानी के साइंस कालेज मैदान में शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा।

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गहलोत-पायलट की ताजपोशी में राहुल-मनमोहन सहित देश के दिग्गज विपक्षी नेताओं का होगा जमावड़ा

गहलोत-पायलट की ताजपोशी में राहुल-मनमोहन सहित देश के दिग्गज विपक्षी नेताओं का होगा जमावड़ा

अब तक सादगी से राजभवन में शपथ लेते आए राजजगह के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पहली बार एक बड़े जश्न और समारोह के साथ जयपुर के बीचों बीच स्थित अल्बर्ट हाॅल पर शपथ लेने जा रहे हैं। आजादी के बाद पहली बार कोई सरकार अल्बर्ट हाॅल पर शपथ ले रही है।

जयपुर: राजजगह में कांग्रेस विधायक दल के नेता अशोक गहलोत और प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट की ताजपोशी समारोह में जयपुर के अल्बर्ट हॉल में सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, एच डी देवेगौड़ा सहित कई दिग्गज नेता शामिल होंगे. मुख्य सचिव डी बी गुप्ता ने बताया कि सोमवार हो होने वाले शपथग्रहण समारोह के लिये अधिकारियों को जिम्मेवारी दे दी गई है जिसके अनुसार सभी अधिकारी अपने अपने काम में जुट गये हैं. शपथ ग्रहण समारोह स्थल पर सुरक्षा के कडे़ बंदोबस्त किये गये हैं. वहीं पुलिस के आला अधिकारियों ने समारोह स्थल पर सुरक्षा, समुचित यातायात व्यवस्था का जायजा लिया. à¤°à¤¾à¤œà¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤¨: शपथ ग्रहण समारोह में देश के दिग्गज विपक्षी नेताओं का होगा जमावड़ा

अशोक गहलोत और सचिन पायलट के शपथ ग्रहण समारोह में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नहीं जाएंगी। हालांकि ममता बनर्जी के बजाय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद नदीमुल हक कल जयपुर में राजजगह के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में टीएमसी के प्रतिनिधि के रूप में शामिल होंगे।

इस समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी शिरकत करेंगी. ऐसा कर वे वही परम्परा निभाएंगी जो अशोक गहलोत ने 213 में वसुंधरा राजे के मुख्यमंत्री बनने पर निभाई थी. 213 के चुनावों में भाजपा सत्ता पर काबिज हुई थी. 13 दिसंबर 213 को वसुंधरा राजे ने बतौर मुख्यमंत्री दूसरी बार शपथ ली थी. जनपथ पर भाजपा नेताओं का मेला लगा था. नरेन्द्र मोदी समेत कई नेताओं ने इस कार्यक्रम में शिरकत की थी.

कांग्रेस विधायक दल के नेता अशोक गहलोत ने अल्बर्ट हाल में आयोजित होने वाले भव्य शपथग्रहण समारोह का जायजा लेने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, एच डी देवेगौड़ा, मल्लिकार्जुन खड़गे, शरद यादव, फारूख अब्दुल्ला, चंद्रबाबू नायडू, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, सीपीआई,सीपीएम, डीएमके, आम आदमी पार्टी, सहित विपक्ष के शीर्ष नेता शामिल होंगे।

मुख्य सचिव डी बी गुप्ता ने बताया कि सोमवार हो होने वाले शपथग्रहण समारोह के लिये अधिकारियों को जिम्मेवारी दे दी गई है जिसके अनुसार सभी अधिकारी अपने अपने काम में जुट गए हैं। राजजगह में मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह स्थल पर सुरक्षा के कडे़ बंदोबस्त किए गए हैं। वहीं पुलिस के आला अधिकारियों ने समारोह स्थल पर सुरक्षा, समुचित यातायात व्यवस्था का जायजा लिया। कांग्रेस के राज्य प्रभारी अविनाश पांडे ने बताया कि शपथ ग्रहण समारोह में समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, भाकपा, माकपा, द्रमुक, आम आदमी पार्टी सहित विपक्ष के शीर्ष नेताओं को आमंत्रित किया गया है।

उल्लेखनीय है कि शपथ ग्रहण समारोह आमतौर पर परंपरा के अनुसार, राजभवन में आयोजित किया जाता रहा है, लेकिन 213 में वसुधरा राजे ने जनपथ में शपथ ग्रहण आयोजन किया था। अशोक गहलोत और सचिन पायलट के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन अल्बर्ट हाल में किया जा रहा है।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उत्तर प्रदेश में रायबरेली में आधुनिक रेल कोच फैक्टरी के विस्तार सहित कई विकास परियोजनाओं का आज शुभारंभ करेंगे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उत्तर प्रदेश में रायबरेली में आधुनिक रेल कोच फैक्टरी के विस्तार सहित कई विकास परियोजनाओं का आज शुभारंभ करेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज उत्तर प्रदेश के रायबरेली में आधुनिक रेल कोच फैक्टरी के विस्तार सहित कई विकास परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे। श्री मोदी फैक्टरी में इस वर्ष तैयार 9वें कोच और हमसफर ट्रेन के डिब्बों का उद्घाटन करेंगे। वे 133 किलोमीटर लंबी रायबरेली-फतेहपुर-बांदा सड़क भी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इसके निर्माण पर 558 करोड़ रुपए की लागत आई है।

इसके बाद प्रधानमंत्री प्रयागराज जाएंगे, जहां वे कुंभ मेले के लिए अत्याधुनिक कमान और नियंत्रण केंद्र का उद्घाटन करेंगे। वे गंगा पूजन करेंगे और स्वच्छ कुंभ प्रदर्शनी भी देखेंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रयागराज में कुंभ मेला में आने वाले श्रृद्धालुओं के सुविधा के लिए विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। श्री मोदी कुंभ मेला परिसर में बने अत्याधुनिक एकीकृत नियंत्रण और कमान केन्द्र का भी उद्घाटन करेंगे। वे नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 147 करोड़ की विभिन्न सीवरेज परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। अपने वयस्त कार्यक्रम के दौरान श्री मोदी संगम पर गंगा पूजन करेंगे और वे किला स्थित अक्षयवट के भी दर्शन करेंगे। प्रधानमंत्री संगम के पास ही स्थित अंदावा में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

7 देशों के मिशन प्रमुख और राजनयिकों ने कल प्रयागराज का दौरा कर कुंभ मेले की तैयारियों का जायजा लिया। विदेश मामलों के राज्‍यमंत्री वी० के० सिंह के साथ राजनयिकों ने एकीकृत नियंत्रण और कमान केंद्र तथा स्वच्छ कुंभ प्रदर्शनी का भी दौरा किया। केंद्र और राज्‍य सरकार कुंभ में पर्यटन की संभावनाओं को तलाशने के लिए काम कर रही है।

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रामचरितमानस की चौपाई सुना ‘मोदी ने दिया राफेल का जवाब’, हमसफर रैक’ को दी हरी झंडी

रामचरितमानस की चौपाई सुना ‘मोदी ने दिया राफेल का जवाब’, हमसफर रैक’ को दी हरी झंडी

नई दिल्ली: राजजगह, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा की पराजय के बीच राफेल सौदे पर सुप्रीम कोर्ट से राहत की संजीवनी मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोनिया गांधी के गढ़ रायबरेली में कोच फ़ैक्टरी में उत्पादित 9वें रेल डिब्बे व हमसफर रेक को हरी झंडी दिखा कर देश को समर्पित किया. प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार रायबरेली में पीएम मोदी ने एक जनसभा को संबोधित किया और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला. पीएम मोदी ने कहा कि पुरानी सरकारों ने यहां अनदेखी की.

राफेल को लेकर जारी घमासान पर पीएम मोदी ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला. पीएम ने कांग्रेस पर सेना के अपमान का आरोप लगाने के साथ ही हालिया राफेल विवाद पर भी जवाब दिया। मोदी ने इसबार गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस की चौपाई के हवाले से कांग्रेस पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा, ‘कुछ लोग झूठे आरोप लगा रहे हैं। उनका (कांग्रेस) हाल वैसा ही है जैसा रामचरितमानस में भगवान राम कहते हैं कि झुठई लेना, झुठई देना, झुठई भोजन, झूठ चबैना।’

पीएम मोदी ने  कहा कि कांग्रेस उन्हें दागदार करने के लिए देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रही है. पीएम मोदी ने कहा कि मैं कांग्रेस से जानना चाहता हूं कि क्या वो इसलिए भड़की हुई है, झूठ पर झूठ बोल रही है क्योंकि भाजपा सरकार जो रक्षा सौदे कर रही है, उसमें कोई क्वात्रोकी मामा नहीं है, क्रिश्चियन मिशेल नहीं है? क्या इसलिए वो अब न्यायपालिका पर अविश्वास का माहौल पैदा करने में जुट गई है?.

पीएम मोदी ने कहा कि यहां आने से पहले मैं पास ही में बनी मॉर्डन कोच फैक्ट्री में था. मैंने उस फैक्ट्री में इस वर्ष बने 9वें डिब्बे को हरी झंडी भी दिखाई. पहले की सरकारों की क्या कार्यसंस्कृति रही है, इसकी गवाह रायबरेली की रेल कोच फैक्ट्री भी है. आगे उन्होंने कहा कि ये फैक्ट्री 27 में स्वीकृत हुई थी. 21 में ये फैक्ट्री बनकर तैयार भी हो गई. लेकिन उसके बाद 4 साल तक इस फैक्ट्री में कपूरथला से डिब्बे लेकर उनमें पेंच कसने और पेंट करने का काम हुआ. जो फैक्ट्री नए डिब्बे बनाने के लिए थी, उसे पूरी क्षमता से कभी काम ही नहीं करने दिया गया.

रायबरेली में एक जनसभा को संबोधित करते वक्त पीएम मोदी ने कांग्रेस को निशाने पर लिया. पीएम मोदी ने कहा कि अगर कोच फैक्टरी की क्षमता बढ़ेगी तो यहां के युवाओं के लिए हर तरह के रोजगार बढ़ेंगे. उस दिन के बारे में सोचिए, जब यहां हर रोज 1-12 नए कोच बनने लगेंगे. स फैक्ट्री की क्षमता का विस्तार, कामगारों, इंजीनियरों, टेक्नीशियनों के लिए भी रोजगार के नए अवसर लेकर आएगा.

पीएम मोदी ने कहा कि जब पहले की सरकार ने यहां पर रेल कोच फैक्ट्री का निर्माण तय किया था, तो ये तय हुआ था कि 5 कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी. लेकिन स्वीकृति इसके आधे पोस्टों को ही दी गई. इतना ही नहीं, 214 में हमने ये भी देखा कि यहां की कोच फैक्ट्री में एक भी नई नियुक्ति नहीं हुई थी. पहले संसाधनों का दुरुपयोग हुआ. मगर अब आज की स्थिति ये है कि लगभग 2 हजार नए कर्मचारियों को हमारी सरकार ने नियुक्त किया है. आज मुझे ये कहते हुए गौरव का एहसास हो रहा है कि आने वाले समय में रायबरेली, रेल कोच निर्माण के मामले में एक ग्लोबल हब बनने वाला है.

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि मोदी को उन्हें गाली देनी है, मैं जानता हूं. मोदी पर वो किसी भी तरह एक दाग लगा देना चाहते हैं, ये भी जानता हूं. लेकिन जानना चाहता हूं कि इसके लिए देश को ताक पर क्यों रख दिया गया है? क्यों देश की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है?. आज देश के सामने दो पक्ष हैं. एक पक्ष सरकार का, जो हर तरह से कोशिश कर रही है कि हमारी सेना की ताकत बढ़े. दूसरा पक्ष उन ताकतों का है, जो किसी भी कीमत पर देश को कमजोर करना हैं. देश देख रहा है कि कांग्रेस उन ताकतों के साथ खड़ी है जो हमारी सेनाओं को मजबूत नहीं होने देना चाहतीं.

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असल जिंदगी में भी जादूगर हैं राजस्थान के सीएम, स्कूली दिनों में दिखाते थे जादू, अब इनकी विनम्रता के विरोधी भी हैं कायल

असल जिंदगी में भी जादूगर हैं राजस्थान के सीएम, स्कूली दिनों में दिखाते थे जादू, अब इनकी विनम्रता के विरोधी भी हैं कायल

राजजगह की राजनीति में जातीय वर्चस्व को तोड़ सत्ता के शिखर तक पहुंचने वाले और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाले अशोक गहलोत को राजजगह की राजनीति का जादूगर कहा जाता है, जिनकी विनम्रता के उनके विरोधी भी कायल हैं।

जोधपुर/जयपुर: राजजगह की सियासत में अशोक गहलोत का जादू कुछ इस तरीके से चला कि आलाकमान को एक बार फिर से सीएम की कुर्सी संभालने का जिम्मा उन्हें ही देना पड़ा। राजजगह की सियासत में अहम चेहरे सचिन पायलट को पीछे छोड़कर तीसरी बार मुख्यमंत्री बने जा रहे अशोक गहलोत असल जिंदगी में भी जादूगर थे। सियासत में अपनी जादूगिरी का जलवा बिखेरने वाले अशोक गहलोत के पिता लक्ष्मण सिंह दक्ष देश के जाने-माने जादूगर थे।Indiwave News Image

पिता से उन्होंने भी जादूगिरी का फन सिखा और जीवन की शुरूआत में उनकी आय का जरिया भी बना। स्कूली दिनों में अशोक गहलोत जादू दिखाया करते थे और उससे होने वाली आय से पढ़ाई का खर्च निकालते थे। छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हुए और बहुत ही जल्द वह संजय गांधी के खास बने गए। युवा अवस्था में सांसद बनकर संसद पहुंचे और 1982 में इंदिरा गांधी की कैबिनेट में मंत्री बने। राजजगह की राजनीति में बड़े-बड़े नेताओं को पीछे करके पहली बार 1998 में मुख्यमंत्री बने और सियासत के असली जादूगर बनकर भी उभरें। Image may contain: 18 people, people smiling, people sitting, table and indoor

हालांकि नतीजों के बाद राज्य में सीएम के नाम पर चली लंबी कश्मकश के बाद पार्टी ने राज्य के इसी जादूगर पर भरोसा जताया है जो सबको साथ लेकर आगे बढ़ने के लिए जाना जाता है।अशोक गहलोतः राजस्थान की राजनीति का ऐसा ‘जादूगर’ जिसकी विनम्रता के विरोधी भी हैं कायल

दो बार राजजगह के मुख्यमंत्री रह चुके अशोक गहलोत माली समाज से आते हैं, जो पिछड़ा वर्ग में आता है। गहलोत के परिवार का खानदानी पेशा किसी जमाने में जादूगरी का करतब दिखाना था। गहलोत के पिता भी एक जादूगर थे। लिहाजा अशोक गहलोत ने भी जादूगरी में हाथ आजमाया, लेकिन राजनीति के मंच पर और राज्य के ऐसे सबसे बड़े नेता बनकर उभरे, जिसका जादू समाज के हर वर्ग पर चलता है।

शुरुआती जीवन की बात करें तो अशोक गहलोत का जन्‍म 3 मई 1951 को राजजगह के जोधपुर में हुआ। गहलोत ने विज्ञान और कानून में स्‍नातक और अर्थशास्‍त्र में एमए की डिग्री हासिल की। छात्र जीवन से ही समाजसेवा और राजनीति में सक्रिय रहे गहलोत का विवाह 27 नवंबर, 1977 को सुनीता गहलोत से हुआ। एक पुत्र वैभव गहलोत और एक पुत्री सोनिया गहलोत के पिता गहलोत को घूमना-फिरना काफी भाता है और कहीं भी सड़क पर कड़क चाय पीने के शौकीन हैं।अशोक गहलोतः राजस्थान की राजनीति का ऐसा ‘जादूगर’ जिसकी विनम्रता के विरोधी भी हैं कायल

सामाजिक जीवन की की बात करें तो गहलोत ने बांग्‍लादेश युद्ध के दौरान 1971 में पश्चिम बंगाल के बनगांव और 24 परगना जिलों में शरणार्थी शिविरों में पीड़ितों की सेवा से शुरुआत की। इसके बाद राजनीतिक जीवन कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई से शुरू हुआ। कहा जाता है कि 7 के दशक में गहलोत पर खुद इंदिरा गांधी की नजर पड़ी थी। कुछ लोगों के अनुसार उस समय 2 साल के रहे गहलोत को इंदिरा गांधी ने राजनीति में आने की सलाह दी। जिसके बाद गहलोत ने कांग्रेस के इंदौर में हुए सम्मेलन में भाग लिया और वहीं उनकी मुलाकात संजय गांधी से हुई। संजय गांधी, गहलोत की क्षमता से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें राजजगह एनएसयूआई का अध्यक्ष बना दिया। गहलोत 1973 से 1979 तक राजस्‍थान एनएसयूआई के अध्‍यक्ष रहे और इस दौरान उन्‍होंने संगठन को काफी मजबूत कर दिया। इसके बाद गहलोत कांग्रेस के जोधपुर जिला अध्यक्ष बने और फिर प्रदेश कांग्रेस के महासचिव भी बनाए गए।

अशोक गहलोतः राजस्थान की राजनीति का ऐसा ‘जादूगर’ जिसकी विनम्रता के विरोधी भी हैं कायल

कांग्रेस में वह दौर युवा नेतृत्व के उभार का दौर था। कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, वायलार रवि, एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद के साथ अशोक गहलोत भी इसी दौर में पार्टी में उभर रहे थे। अपने स्वभाव के अनुरूप गहलोत राजजगह में लो प्रोफाइल रहते हुए काम करते रहे। लेकिन संजय गांधी की विमान हादसे में मौत के बाद जब राजीव गांधी पार्टी में सक्रिय हुए, तब उन्होंने गहलोत पर भरोसा जताते हुए उन्हें केंद्र की इंदिरा गांधी की सरकार में राज्यमंत्री बनाने की सिफारिश कर दी। इसके बाद गहलोत इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और पी वी नरसिम्‍हा राव की सरकारों में तीन बार केन्‍द्रीय मंत्री बने।

गहलोत ने अपना पहला चुनाव 198 में जोधपुर लोकसभा क्षेत्र से लड़ा और जीत दर्ज किया। जोधपुर से वह पांच बार 198-1984, 1984-1989, 1991-96, 1996-98 और 1998-1999 लोकसभा पहुंचे। इस दौरान गहलोत राज्य और केंद्र की सरकारों में मंत्री रहने के साथ ही पार्टी संगठन में सक्रिय रहे। गहलोत को 3 बार राजजगह प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्‍यक्ष रहने का गौरव प्राप्‍त है। पहली बार गहलोत महज 34 साल की उम्र में ही राजजगह प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्‍यक्ष बनाए गए थे। गहलोत ने 1985 से 1989, 1994 से 1997 और 1997 से 1999 के बीच राजस्‍थान कांग्रेस का अध्यक्ष पोस्ट संभाला।Magical Ashok Gehlot broke the caste myths of politics and reached the top, journey of life! | स्कूली दिनों की जादूगरी से 'राजनीति के जादूगर' कैसे बन गए अशोक गहलोत, जानें जिंदगी का सफरनामा!

संगठन से लेकर सरकार में अनुभव के कारण ही पार्टी ने 1998 में गहलोत को राज्य के मुख्यमंत्री की कमान पहली बार सौंपी। उनका यह कार्यकाल अन्‍य महत्‍वपूर्ण उपलब्धियों के अलावा अभूतपूर्व अकाल प्रबंधन के लिए जाना जाता है। इसी कार्यकाल के दौरान राजस्‍थान में सदी का सबसे भयंकार अकाल पड़ा था। कहा जाता है कि गहलोत के प्रभावी और कुशल प्रबंधन से अकाल पीड़ितों तक इतना अनाज पहुंचाया गया, जितना अनाज वे लोग शायद अपने खेतों से भी नहीं हासिल कर पाते। गहलोत को गरीब-असहाय लोगों की पीड़ा को समझने वाले राजनेता के रूप में जाना जाता है। यही वजह थी कि अशोक गहलोत 13 दिसंबर 28 को दूसरी बार राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्री बने। राजधानी दिल्ली में आईएनए मार्केट के ठीक सामने दिल्ली हाट के निर्माण का श्रेय गहलोत को ही जाता है। इस हाट के निर्माण से देश भर के शिल्पकारों, हस्तशिल्पकारों के बनाए उत्पाद बिना किसी बिचौलिए के सीधे ग्राहकों तक पहुंचते हैं, जिससे इन हस्तकलाओं को फलने-फुलने का एक बड़ा जरिया मिला।Image may contain: 8 people, people smiling, people standing

राजजगह की राजनीति के सबसे अहम जातीय वर्चस्व को तोड़ एक कमजोर माने जाने वाले समाज से आए अशोक गहलोत वर्तमान में राजजगह की राजनीति में सबसे बड़े जननेता हैं। गहलोत की विनम्रता के उनके विरोधी भी कायल हैं। ये उनकी विनम्रता का ही जादू है कि राजजगह जैसे प्रदेश में जहां की राजनीति में क्षत्रिय, जाट, गुर्जर और ब्राह्मण हमेशा से प्रभावी रहे हैं, वहां पिछड़ा माने जाने वाले समाज के गहलोत ने अपने आपको सबसे बड़े नेता के रूप में स्थापित किया। सदा मुस्कुराते रहने वाले गहलोत राज्य की सभी जातियों खासकर पिछड़ी जातियों में सर्वमान्य नेता हैं। यही वजह रही कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अशोक गहलोत को तीसरी बार राज्य की बागडोर सौंपी है।

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कुंभ नगरी पहुँचे दुनिया भर से 71 राजनयिक, तिरंगे के साथ पुष्पवर्षा कर किया गया स्वागत

कुंभ नगरी पहुँचे दुनिया भर से 71 राजनयिक, तिरंगे के साथ पुष्पवर्षा कर किया गया स्वागत

 

विविधता में एकता और वसुधैव कुटुंबकम की संकल्पना को और करीब से जानने-समझने के लिए पूरी दुनिया संगम तट पर सिमट आएगी। सृष्टि की रचना के बाद ब्रह्मा की ओर से प्रथम यज्ञ करने का सौभाग्य अर्जित करने वाली संगम की रेती से फिर विश्व कल्याण और सर्वमंगल की कामना का संदेश जाएगा।
इसे पूरा करने के लिए इस कुंभ में 192 देशों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। और आज 71 देशों का प्रतिनिधिमंडल संगम क्षेत्र पहुंच गया है। जहां पांच घंटे रुककर प्रदर्शनी, डाक्यूमेंटरी आदि के माध्यम से भव्य और दिव्य कुंभ की छवियों को निहारेगा।

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राजनयिकों के स्वागत में सजी संगम की रेती… चलो चलें कुंभ अभियान का भाग बनने और उसे सार्थक करने वाले राजनयिकों के स्वागत के लिए संगम की रेती सजाई गई। इसका मकसद यही है कि राजनयिक भव्य कुंभ की छवियों के साथ जाएं और अपने देशवासियों को भी यहां आने के लिए प्रेरित, प्रोत्साहित करें। यूनेस्को पहले ही दुनिया के सबसे बड़े मेले के रूप में कुंभ को धरोहरों की सूची में शामिल कर चुका है। अब दुनिया भर में इसे साबित करने की कोशिश भी है। कोशिश की जा रही है कि एयरपोर्ट से लेकर संगम तक हर जगह, अलग-अलग अंदाज में उनका ऐसा स्वागत हो जो उन्हें अभिभूत करें। खान-पान की व्यवस्था ताज की टीम को दी गई है तो अन्य तैयारियों के लिए दिल्ली की इवेंट मैनेजमेंट कंपनी जुटी है। प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने भी दावा किया है।

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दुनिया भर के राजनयिकों के स्वागत और उन्हें दिव्य-भव्य कुंभ की छवियों को दिखाने के लिए संगम की रेती पूरी तरह तैयार है।

संगम क्षेत्र में शनिवार को दिव्य-भव्य कुंभ की तैयारियां देखने के लिए विदेशी राजनयिकों का दल विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह साथ पहुंचा है। उनका विशेष विमान सुबह 9.3 बजे बमरौली एयरपोर्ट पर उतरा। वहां से वे होटल पहुंचे हैं। जहां से करीब 1.45 बजे संगम के लिए रवाना हुए।

दुनिया के विभिन्न देशों के प्रतिनिधि आस्था और आधुनिकता के संगम के बीच सनातन धर्म और कुंभ के मर्म को संगम की रेती पर इकठ्ठा होकर जानेंगे। यह भी कि बिना निमंत्रण कौन का आकर्षण करोड़ों श्रद्धालुओं को कैसे रेती तक खींच लाता है। अलग-अलग प्रांत, अलग भाषाएं, अलग मत, पंथ, संप्रदाय लेकिन आस्था का सरोकार एक जिससे बंधकर जनसमुद्र बनता है। कुंभ की यही कस्तूरी लेकर राजनयिक विदा होंगे और अपने देश के लोगों को रेती पर आने की राह दिखाएंगे।

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संगम में कुंभ पर आधारित प्रदर्शनी देखने के बाद उन्हें प्रोजेक्टर के माध्यम से भी कुंभ की जानकारी दी जाएगी। यहां से वे संगम नोज और वहां से क्रूज से अरैल स्थित टेंटेज सिटी जाएंगे। विदेशी प्रतिनिधि वहां बन रही विशेष गैलरी में अपने-अपने देश का ध्वज फहराएंगे। संगम वापसी पर भोजन करेंगे। फिर बड़े हनुमान मंदिर, इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर, मेला पुलिस लाइन, अस्पताल आदि देेखेंगे। इसके बाद बमरौली एयरपोर्ट से विशेष विमान से नई दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे।

 

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मिजो नेशनल फ्रंट के नेता जोरमथंगा आज मिजोरम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे

मिजो नेशनल फ्रंट के नेता जोरमथंगा आज मिजोरम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे

मिजोरम में मिजो नेशनल फ्रंट-एम.एन.एफ. प्रमुख जोरमथंगा आज मुख्यमंत्री पोस्ट की शपथ लेंगे। हमारे संवाददाता ने बताया है कि राज्यपाल के. राजशेखरन आइज़ोल में राजभवन में एक समारोह में उन्हें पोस्ट और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।

अब से कुछ ही घंटों में मिजोरम में नई मंत्रिपरिषद् के सदस्यों को शपथ दिलाई जाएगी। दो दिन पहले नव-निर्वाचित विधायकों ने एम एन एफ अध्यक्ष जोरमथंगा को अपना नेता चुना था। दस साल बाद मिजोरम में एम एन एफ तीसरी बार सरकार बना रहा है। इससे पहले, 1998 से 28 के बीच लगातार दो कार्यकाल में एम एन एफ की सरकार थी। उस समय भी मुख्यमंत्री जोरमथंगा थे। अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि शपथग्रहण समारोह में अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया है।

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20 तक निपटा लें अपना काम, 21 से 26 दिसंबर तक 5 दिन बैंको में लगा मिलेगा ताला…

20 तक निपटा लें अपना काम, 21 से 26 दिसंबर तक 5 दिन बैंको में लगा मिलेगा ताला…

नई दिल्ली:  बैंक ग्राहकों के लिए बेहद जरुरी खबर आ रही है. आप को बता दे  अगर बैंक से जुड़ा आपका कोई जरूरी काम अधूरा है तो उन्हें इस हफ्ते ही निपटा लें। वरना बेहद परेशानियों में आ सकते है. अगले हफ्ते के अंत से बैंक 5 दिनों के लिए बंद रहने वाले हैं। दरअसल, सभी बैंक 21 दिसंबर से लेकर 26 दिसंबर के बीच 5 दिनों के लिए बंद होंगे। ऐसे में आपके जरूरी काम ना फंसे इसके लिए आप बैंक से जुड़े सभी काम को 2 दिसंबर तक पूरा कर लें। 21 दिसंबर को बैंककर्मी हड़ताल पर हैं, जिस कारण बैंक के काम नहीं हो पाएंगे।

बैंक कर्मचारी रहेंगे 5 दिन  हड़ताल पर

बैंक कर्मचारी 21 दिसंबर को केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में हड़ताल पर रहेंगे। जबकि 22 दिसंबर पर महीने का चौथा शनिवार है, जिस कारण बैंक बंद रहेंगे। वहीं 23 दिसंबर पर रविवार होने के वजह से बैंक बंद होंगे। इस प्रकार से बैंक तीन दिन लगातार बंद रहेंगे। तीन दिन तक बंद रहने के बाद 24 दिसंबर पर बैंक वापस खुलेंगे।

इस दिन भी आप बैंक से जुड़े अपने काम को निपटा सकते हैं। हालांकि 25 दिसंबर पर क्रिस्मस होने के बाद बैंक कर्मचारियों की छुट्टी होगी। इस दिन भी आपका बैंकिंग से जुड़ा काम नहीं हो सकेगा। वहीं 26 दिसंबर को यूनाइेड फोरम की हड़ताल है, जिस कारण बैंक बंद रहेंगे। इस तरह से 21 दिसंबर से 26 दिसंबर के बीच 5 दिनों के लिए बैंक बंद होंगे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक

26 दिसंबर पर बैंक कर्मी सैलरी वृद्धि को लेकर विरोध करेंगे। दरअसल इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने बैंक कर्मियों के सैलरी में 8 फीसदी की वृद्धि की मांग रखी थी, जिसे बैंक ने ठुकरा दिया। जिसके खिलाफ बैंक कर्मी 26 दिसंबर को हड़ताल कर रहे हैं। बैंक कर्मचारियों की मांग है कि उनकी सैलरी 7वें पे स्केल के स्तर पर की जाए।

इसके साथ ही बैंक कर्मी बैंक ऑफ बड़ोदा, देना बैंक और विजया बैंक के मर्जर को लेकर भी विरोध कर रहे हैं। ध्यान देने वाली बात यें है कि बैंक कर्मचारी पहले भी कई बार हड़ताल की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन आखिरी मौके पर प्रशासन से बातचीत होने के बाद वे हड़ताल वापस भी ले लेते हैं।

21 दिसंबर को बैंककर्मी केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में हड़ताल पर रहेंगे। 22 दिसंबर पर महीने का चौथा शनिवार है, जिस कारण बैंक बंद रहेंगे। 23 दिसंबर पर रविवार होने के वजह से बैंक बंद होंगे। तीन दिन तक बंद रहने के बाद 24 दिसंबर को बैंक वापस खुलेंगे। 25 दिसंबर पर क्रिस्मस होने के बाद बैंक कर्मचारियों की छुट्टी होगी। 26 दिसंबर को यूनाइेड फोरम की हड़ताल है, जिस कारण बैंक बंद रहेंगे।
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कांग्रेस ने कहा- सरकार ने SC को किया गुमराह, देश से मांगे माफी

कांग्रेस ने कहा- सरकार ने SC को किया गुमराह, देश से मांगे माफी

नई दिल्ली। राफेल डील की जांच कराने की मांग को लेकर दायर याचिकाओं के सुप्रीम कोर्ट से खारिज होने के बाद ये मामला और भी तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया है तो साथ ही मोदी सरकार पर एक बार फिर हमला बोला है। लोक लेखा समिति के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोला कि सीएजी रिपोर्ट सदन में पेश की गई और पीएसी के सामने भी, इसके बाद पीएसी ने इसकी जांच की। सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने कहा कि ये जानकारी पब्लिक डोमेन में मौजूद है। तो सरकार बताए कि ये जानकारी कहां मौजूद है? क्या आपने इसे देखा है?

उन्होंने कहा कि अभी तो कैग की रिपोर्ट आई ही नहीं है, हम पीएसी के अन्य सदस्यों से बात करेंगे और कैग को बुलाकर पूछेंगे। खड़गे ने एक बार फिर राफेल डील की जांच जेपीसी से कराए जाने की मांग की। कांग्रेस नेता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में कैग रिपोर्ट का जिक्र क्यों किया गया। खड़गे ने मोदी सरकार से माफी मांगने की मांग की।

उन्होंने कहा कि सरकार ने राफेल पर सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोला है। मल्लिकार्जुन खड़गे PAC के चेयरमैन हैं। बता दें कि राफेल डील की जांच को लेकर दायर याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था और कहा था कि इस डील में कोर्ट को कोई कमीं नजर नहीं आती है। इसके पहले, शुक्रवार को भी राफेल विवाद पर राहुल गांधी ने कहा था, ‘हमारा सीधा सवाल है कि 526 करोड़ रुपये का हवाई जहाज 16 करोड़ रुपये में क्यों खरीदा गया। 3, रुपये का कांट्रैक्ट एचएएल से क्यों छीना गया, हिंदुस्तान के युवाओं से रोजगार क्यों छीना गया। गांधी ने कहा कि जिस दिन राफेल मामले की जांच हो गयी उस दिन दो नाम निकलेंगे एक अनिल अंबानी और नरेंद्र मोदी।’

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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस विधायक दल की आज रायपुर में नेता का चुनाव करेगे

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस विधायक दल की आज रायपुर में नेता का चुनाव करेगे

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस विधायक दल की आज रायपुर में होने वाली बैठक में नेता का चुनाव कर लिया जाएगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला भी हो जाएगा। 

कल नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मुख्यमंत्री के नाम को लेकर हुई चर्चा के बाद पार्टी के पर्यवेक्षक मलिकार्जुन खड़गे, प्रदेश प्रभारी बी एस पूनिया प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल तथा पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता टी एस सिंहदेव, चरणदास महन्त तथा ताम्रध्वज साहू आज रायपुर लौट रहे हैं। नई दिल्ली में हुई चर्चा के बाद मुख्यमंत्री पोस्ट के सभी संभावित दावेदारों ने इस बारे में निर्णय लेने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अधिकृत कर दिया है।

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CM के बाद अब गहलोत सरकार के संभावित मंत्रिमंडल पर चर्चा तेज, ये चेहरे हो सकते हैं शामिल

CM के बाद अब गहलोत सरकार के संभावित मंत्रिमंडल पर चर्चा तेज, ये चेहरे हो सकते हैं शामिल

राजजगह में सीएम पोस्ट पर फैसला होने के बाद अब कौन बनेंगे मंत्री, की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं. इस वक्त कई नाम चर्चाओं में हैं जो या तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं या फिर पूर्व में अशोक गहलोत मंत्रिमंडल में शामिल रहे है. सवाल यह है कि क्या इस बार भी परंपरागत सियासी समीकरण के हिसाब से मंत्री बनाए जाएंगे या नई सामाजिक जातिगत समीकरण को ध्यान में रख कर मंत्रिमंडल का गठन होगा?

जयपुर: राजजगह के नए मुख्यमंत्री घोषित किए गए अशोक गहलोत के घर पर बधाई देने वाले लोगों का का तांता लगा हुआ है. इस बीच गहलोत और सचिन पायलट गुट के बीच मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए विधायकों की सूची तैयार की जा रही है. इसमें माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के पहले मंत्रिमंडल का स्वरूप छोटा होगा ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग लोकसभा चुनाव में मेहनत कर सके.

इस छोटे मंत्रिमंडल में गहलोत और पायलट गुट के सदस्यों की संख्या बराबर-बराबर रखी जाएगी. माना जा रहा है कि शांति धारीवाल, महेंद्रजीत सिंह मालवीय, प्रमोद जैन भाया, सीपी जोशी, हेमाराम चौधरी, महेश जोशी, रघु शर्मा, रमेश मीणा, हरीश चौधरी, नरेंद्र बुढ़ानिया और महेंद्र चौधरी जैसे लोग शामिल हो सकते हैं. लालचंद कटारिया और कृष्णा पूनिया का भी नाम सामने आ रहा है. राजपूतों में दीपेंद्र सिंह शेखावत, प्रताप सिंह खाचरियावास और मुस्लिम कोटे से अमीन काजी, साले मोहम्मद, अमीन खान का नाम सामने आ रहा है. वहीं अगर नए चेहरों की बात करें,तो राज्यमंत्री और संसदीय सचिवों में उन्हें जगह मिल सकती है.

लोकसभा चुनाव पर है फोकस!

इस बार के विस चुनाव में जातिगत सामाजिक समीकरणों ने बड़ी भूमिका निभाई है. भाजपा के परंपरागत मतदाताओं- राजपूतों की नाराजगी प्रभावी रही है तो ब्राह्मणों और आदिवासियों के वोटों का फिर से कांग्रेस की ओर लौटना भाजपा को भारी पड़ा है. इस बीच अब मंत्री जो भी बनें, इस बात का खास ध्यान रखा जाएगा कि उनके प्रभाव से लोकसभा चुनाव में 25 में से ज्यादा से ज्यादा सीटें प्राप्त करने का लक्ष्य हांसिल किया जा सके. पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने राजजगह में 25 में से 25 सीटें जीत लीं थी और अभी विधानसभा के परिणामों पर नजर डालें तो वोट प्रतिशत बताता है कि इनमें से करीब आधी सीटें भाजपा के हाथ से निकल जाएंगी. भाजपा की कोशिश रहेगी कि वह सियासी माहौल सुधार कर फिर से ज्यादा से ज्यादा सीटें प्राप्त करे तो कांग्रेस भी चाहेगी कि बेहतर काम करके ज्यादा-से-ज्यादा लोस सीटें जीती जाएं.

मुख्यमंत्री आवास का रंग रोगन शुरू

उधर एक बार फिर से 5 साल बाद राजजगह का मुख्यमंत्री निवास 8 सिविल लाइन्स को रंग रोगन और तैयार करने के लिए खोल दिया गया है. पिछले 5 सालों से वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री निवास में नहीं गई थी और अपने विधायक निवास 13 सिविल लाइंस को ही मुख्यमंत्री निवास बना दिया था. अब एक बार फिर से उसे तैयार किया जा रहा है और माना जा रहा है कि शपथ लेने के एक सप्ताह बाद अशोक गहलोत मुख्यमंत्री निवास में शिफ्ट हो सकते हैं.

जनपथ पर शपथ लेने की तैयारी

17 दिसंबर को दिन में 1: बजे अशोक गहलोत मुख्यमंत्री और सचिन पायलट उपमुख्यमंत्री पोस्ट की शपथ लेंगे. इस बार पहली बार कांग्रेस राज भवन से बाहर निकल कर सार्वजनिक जगह पर शपथ समारोह करना चाहती है. इसके लिए हाई कोर्ट से इजाजत ली जा रही है ताकि विधानसभा के सामने जनपख पर शपथ ग्रहण समारोह आयोजित की जाए. जनपथ पर वसुंधरा राजे पिछली दो बार से मुख्यमंत्री पोस्ट की शपथ लेती रही है.

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Saturday, 15 December 2018

मिजो नेशनल फ्रंट प्रमुख जोरमथंगा ने मिजोरम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली

मिजो नेशनल फ्रंट प्रमुख जोरमथंगा ने मिजोरम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली

मिजोरम में मिजो नेशनल फ्रंट प्रमुख ज़ोरमथंगा ने आज मुख्यमंत्री पोस्ट की शपथ ली। वे तीसरी बार राज्‍य के मुख्‍यमंत्री बने हैं। हमारी संवाददाता ने बताया है कि राज्यपाल के. राजशेखरन ने आइजोल में राजभवन में उन्हें पोस्ट और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

श्री जोरमथंगा ने आज तीसरी बार मुख्‍यमंत्री पोस्ट की शपथ ली। 74 वर्षीय जोरमथंगा इससे पहले, 1998 से 28 तक मिजोरम के मुख्‍यमंत्री रह चुके हैं। श्री तौनलुइया को उप-मुख्‍यमंत्री बनाया गया है। दस अन्‍य विधायकों ने भी आज मंत्रिपोस्ट की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में राष्‍ट्र गान गाया गया और उसके बाद बाइबल का पाठ हुआ। समारोह में पूर्व मुख्‍यमंत्री ललथनहौला, मेघालय के मुख्‍यमंत्री कोनर्ड संगमा और विभिन्‍न दलों के नेता उपस्थित थे।

चालीस सदस्‍यों वाली राज्‍य विधानसभा के लिए 28 नवम्‍बर को हुए चुनाव में एम एन एफ ने कांग्रेस से सत्‍ता छीनकर 26 सीटों पर विजय प्राप्‍त की।

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कांग्रेस आज छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री का नाम घोषित कर सकती है

कांग्रेस आज छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री का नाम घोषित कर सकती है

छत्‍तीसगढ़ में कांग्रेस आज शाम मुख्‍यमंत्री के नाम की घोषणा कर सकती है। हमारे संवाददाता ने बताया है कि आज रायपुर में कांग्रेस विधानमंडल दल के नए नेता के चयन के लिए बैठक होगी।

कल नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मुख्यमंत्री के नाम को लेकर हुई चर्चा के बाद पार्टी के पर्यवेक्षक मलिकार्जुन खड़गे, प्रदेश प्रभारी बी एस पूनिया प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल तथा पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता टी एस सिंहदेव, चरणदास महन्त तथा ताम्रध्वज साहू आज रायपुर लौट रहे हैं। नई दिल्ली में हुई चर्चा के बाद मुख्यमंत्री पोस्ट के सभी संभावित दावेदारों ने इस बारे में निर्णय लेने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अधिकृत कर दिया है।

राज्‍य विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 68 सीटें जीतकर 9 सदस्‍यीय विधानसभा में दो तिहाई से अधिक का बहुमत हासिल किया है।

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मास्टर ट्रेनरों को ई0वी0एम0 एवं वी0वी0पैट का दिया गया प्रशिक्षण…

मास्टर ट्रेनरों को ई0वी0एम0 एवं वी0वी0पैट का दिया गया प्रशिक्षण…

 

श्रावस्ती - जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी के निर्देशानुसार कलेक्ट्रेट सभागार में उप जिला निर्वाचन अधिकारी/अपर जिलाधिकारी योगानन्द पाण्डेय की अध्यक्षता में आगामी सामान्य लोक सभा निर्वाचन-219 के परिपेक्ष्य में मास्टर ट्रेनरों को ईवीएम एवं वीवीपैट का प्रशिक्षण देने हेतु ट्रेनिंग दी गई। अपर जिलाधिकारी ने बताया कि विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र श्रावस्ती तथा विधानसभा निर्वाचन भिनगा के लिए के लिए कुल 3 मास्टर ट्रेनर रखे गये।

7 लोकतन्त्र सेनानियों/आश्रितों को बाटें गये नवीव परिचय पत्र..

अपर जिलाधिकारी ने बताया है कि निर्वाचन आयोग ने लोक सभा चुनावों में ईवीएम(इलेक्ट्रानिक वोटिग मशीन) के साथ ही वीवीपैट(वोटर-वेरिफाइएबल पेपर ऑडिट ट्रेल ) मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि वोटर एक पेपर स्लिप के जरिए यह सुनिश्चित कर सकें कि उनका वोट उसी को गया है, जिसे उन्होंने डाला है। प्रशिक्षण उप जिला निर्वाचन अधिकारी/अपर जिलाधिकारी ने दिया।

सटर तोड़कर चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश 4 अभियुक्त गिरफ्तार…

इस अवसर पर उप जिलाधिकारी भिनगा(न्यायिक) मायाशंकर यादव, अतिखाली उप जिला मजिस्ट्रेट धीरज श्रीवास्तव, जिला कृषि अधिकारी आरपी राना, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी छोटेलाल, निर्वाचन विभाग के सुनील श्रीवास्तव सहित समस्त मास्टर ट्रेनर उपस्थित रहे।

 

रिपोर्टर - प्रवीण कुमार मिश्रा

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